Friday, September 1, 2023

दास्ताने करबला, क़िस्त-15*

*दास्ताने करबला, क़िस्त-15*

*उमर बिन सा‘द और बाईस हज़ार (22000) का लश्कर*

जब इब्ने ज़्याद को पता चला कि हज़रत इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने यजीद की बैअ्त करने से इन्कार कर दिया तो उसका गुस्सा व तैश और बढ़ गया। उसने और लश्कर बढ़ा दिये, और उसका सिपेह सालार *उमर बिन सा‘द* को बनाया, जो उस ज़माने में मुल्के "रै" का गवर्नर था। रै खुरासान का एक शहर है जो ईरान में है, आजकल उसे तेहरान के नाम से जाना जाता है। 

*इमाम हुसैन की अज़मत और फज़ीलत से हर कोई वाक़िफ़ था।* इसलिए पहले तो उमर बिन सा‘द ने सिपेह सालार बनने से गुरैज़ करना चाहा, लेकिन इब्ने ज़्याद ने कहा कि या तो हुकूमत छोड़ दो या फिर इमाम हुसैन से मुक़ाबला करो। *दुनियावी हुकूमत की लालच ने इब्ने सा‘द को जंग पर आमदा कर दिया।*

इब्ने सा‘द तमाम लश्कर ले कर इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के मुक़ाबले के लिये रवाना हुआ। इब्ने ज़्याद बद निहाद थोड़ा-थोड़ा लश्कर उसके पास भेजता रहा, *यहां तक कि इब्ने सा‘द के पास बाईस हज़ार का लश्कर जमा हो गया।* इब्ने सा‘द ने अपने *22000* के लश्कर के साथ करबला पहुंच कर फ़ुरात के किनारे पड़ाव किया और वहां अपना मर्कज़ क़ायम किया। 

हैरत की बात यह है कि दुनिया की किसी भी जंग में जंगे करबला की मिसाल नहीं मिलती है कि, *अहले बैअ्ते अत़हार कुल बयासी (82) हज़रात थे, जिनमें बीबियां भी, बच्चे भी, बीमार भी और वह भी बे इरादा ए जंग आए हैं। (रज़िअल्लाहु तआला अन्हुम अजमईन)* 

*यज़ीदियों को बयासी अहले बैअ्ते अत़हार का इसक़दर ख़ौफ़ हुआ कि इस छोटी सी जमाअत के लिये दो गुनी नहीं, चार गुनी नहीं, दस गुनी नहीं, बल्कि ढाई सौ गुनी तादाद को भी काफ़ी ना समझा और फौजों के अंबार लगा दिये यानी कुल 82, के मुक़ाबले में 22000। यह है अल्लाह तबारक व तआला के महबूब बंदों का बातिल को डर, हम मुसलमान भी अगर हक़ पसंद परहेज़गार पाबंदे शरा बन जाएं तो दुनिया की कोई भी ज़ालिम ताक़त हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती बल्कि हम ही ग़ालिब रहेंगे क्योंकि यह क़ुरआन से साबित है कि ईमान वाले परहेज़गार ही ग़ालिब रहेंगे, इस लिए मज़बूत ईमान वाला और परहेज़गार बनने के लिए मसलके आलाहज़रत को मज़बूती से पकड़ लो)

इब्ने सा‘द की और से लगातार इमाम हुसैन को यज़ीद की बैअ्त करने पर इसरार किया जा रहा था, *जब आप पर लश्करी ताक़त का कोई असर ना हुआ, तो ज़ालिमों ने आपके क़ाफ़िले पर फ़ुरात नदी का पानी बन्द कर दिया,* ताकि भूख और प्यास की शिद्दत से आप मजबूर हो जाएं, और बैअ्त को क़ुबूल करने पर मजबूर हो जाएं।

*📘सवानाहे करबला सफ़ह 134)*

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी अगली पोस्ट में)*

*मिन जानिब जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा, गुमला, झारखंड*

*Next........*

*अपने दोस्तों रिश्तेदारों को शेयर करें ताकि वह भी अपने इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/DaFT763snD2FdExSL6rdpF
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

दास्ताने करबला, क़िस्त-14*

*दास्ताने करबला, क़िस्त-14*

*कूफ़ियों की बद-अख़्लाक़ी और करबला का मैदान*

हज़रत इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को रास्ते ही में हज़रत मुस्लिम और उनके बच्चों के शहीद हो जाने की ख़बर मिल जाने के बावुजूद, आप ने सफ़र जारी रखा। 

आपके मक्का से रवानगी की ख़बर पाकर इब्ने ज़्याद ने *हुर्र बिन रूबाही को एक हज़ार का लश्कर देकर हज़रत इमाम को घेरकर कूफ़ा लाने के वास्ते भेज दिया।*

जब कूफ़ा दो मंजिल की दूरी पर रह गया तब आपको हुर्र बिन रूबाही मिला, *हुर्र के साथ 1000 हथियार बन्द सवार थे।* हज़रत इमाम हुसैन ने जब लश्कर को देखा तो एक शख़्स को मालूम करने के लिये भेजा कि यह  कैसा लश्कर  है, इतने में हुर्र इब्ने रूबाही ख़ुद हज़रत इमाम के सामने आया और कहने लगा कि, *मुझे इब्ने ज़्याद ने आपको घेर कर उसके पास ले जाने के लिये भेजा है।*

हज़रत इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने उस लश्कर मे ख़ुत्बा पढ़कर सुनाया कि: 

 *"ऐ लोगो मेरा इरादा इधर आने का न था, मगर पै दर पै (एक के बाद एक) तुम्हारा खत पहुंचे, और क़ासिद आए कि जल्दी तशरीफ लाओ, इसलिए  मैं आया हूं।*

हुर्र बोले की खुदा की क़सम!  मै उन खुतूत से ख़बरदार नहीं हुं।

*हजरत इमाम हुसैन ने फरमाया :*

       *'मगर तुम्हारे इसी लश्कर में बहुत से ऐसे आदमी मौजूद हैं, जिन्होंने मुझे ख़त लिखे फिर आपने खुतूत पढ़कर सुनाये, अकसर ने सिर निचा किया और कोई जवाब न दिया।*

हुर्र ने हज़रत इमाम से कहा कि : "हजरत इमाम हुसैन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) ❗️  इब्जे ज्याद ने मुझे हुक्म दिया है कि आपको घेरकर उसके पास ले आऊं। मगर मेरे हाथ कट जायें जो आप पर तलवार उठाऊं। 
        ‘लेकिन मुख़ालिफ़ मेरे साथ हैं, इसलिए मसलेहत यही है कि मैं आपके साथ रहुं। रात को आप मसतुरात (औरतों) का बहाना करके मुझसे अलग हो जाना और जब लश्कर वाले सो जाये तो आप जिस तरफ़ चाहें चले जायें। मैं सुबह को कुछ देर जंगल मे तलाश करके वापस चला जाऊंगा और इब्ने ज़्याद से कुछ बहाना कर दूंगा...!!

*📘सिर्रूश्शहादतैन, सफ़ह-19,*
*📗 तज़किरा-ए-हुसैन, सफ़ह-19)* 

हज़रत इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु और उनके काफ़िले को एक हज़ार के लश्कर ने घेर लिया। *ना ही उन्हें शहर के अंदर दाखिल होने दिया जा रहा था, ना ही वह वापस अपने वतन जा सकते थे।* बिल आख़िर आप कूफ़ा की राह से हट गए, और आपको क़ाफ़िले समेत करबला में नुज़ूल फ़रमाना पड़ा। 

🗓 *ये सन 61 हिजरी मुहर्रम की दूसरी तारीख थी।* आप ने इस मक़ाम का नाम दरयाफ़्त किया तो मालूम हुआ कि, *इस जगह को करबला कहते हैं। इमाम हुसैन करबला से वाक़िफ थे, और आपको मालूम हुआ कि करबला ही वह जगह है जहां अहले बैअ्ते अत़हार को राहे हक़ में अपने ख़ून को बहाना होगा।* 

आप को इन दिनों *हुज़ूर सय्यदे आलम सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम* की ज़्यारत नसीब हुई, और आपको शहादत की ख़बर दी गई और आपके सीना ए मुबारक पर दस्ते अक़दस रख कर दुआएं फ़रमाईं।

⛺️अजीब वक़्त है कि जिनको महेमान बनाकर बुलाया गया था, *उन्हें इस तरह बे सरो सामान खुले मैदान में तपती हुई रेत पर तेज़ धूप में औरतों और बच्चों समेत अपना पड़ाव डालने पर मजबूर किया जा रहा है।* और इन मुसाफिरों के सामने हज़ार का लश्कर उन्हें अपनी तलवार और नेज़ों की कुव्वत दिखा रहा है।

अभी इतमीनान से बैठने और थकान दूर करने की सूरत भी नज़र न आयी थी कि *इमामे हुसैन की ख़िदमत में इब्ने ज़्याद का ख़त पहुंचा जिसमें उस ने हज़रत इमाम हुसैन से यज़ीद पलीद की बैअ्त तलब की थी। आपने वह ख़त पढ़ कर डाल दिया और क़ासिद से बैअ्त कर ने से इन्कार कर दिया।---------*

*📚 सवानाहे करबला सफ़ह-131)*

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी अगली पोस्ट में)*

*मिन जानिब जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा, गुमला, झारखंड, इंडिया*

*Next........*

*अपने दोस्तों रिश्तेदारों को शेयर करें ताकि वह भी अपने इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/DaFT763snD2FdExSL6rdpF
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

Sunday, August 27, 2023

दास्ताने करबला, क़िस्त-13*

*दास्ताने करबला,  क़िस्त-13*

*हज़रत इमाम हुसैन और अहले बैअ्त की कूफ़े को रवानगी*

हज़रत मुस्लिम बिन अक़ील रज़िअल्लाहु तआला अन्हु का खत मिलने पर आपने सफ़रे इराक़ का इरादा फ़रमाया । लेकिन सहाबा ए किराम और आपके दीगर असहाब, इमाम हुसैन के इस सफ़र से राज़ी ना थे। *उन्होंने आपको सफ़र मुल्तवी करने पर इसरार किया।* लेकिन कूफ़ियों की दरख़्वास्त और हज़रत मुस्लिम का ख़त आपको सफ़र करने से ना रोक पाया। 

*चुनांचे, सन 60 हिजरी 3 जिल हिज्जा को, हज़रत इमामे हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु मक्का ए मुअज़्ज़मा से कूफ़ा की तरफ़ रवाना होते हैं। आपके साथ आपके अहले बैअ्त और ख़ुद्दाम इस तरह कुल मिला कर 82 लोग शामिल थे ।*

यह मुख़्तसर सा अहले बैअ्त का क़ाफ़िला मक्का मुअज़्ज़मा से रुख़सत हुआ *तो, मक्का शरीफ़ का बच्चा- बच्चा इस क़ाफ़िले को रुख़सत होता देखकर आबदीद और गमगीन हो रहा था।* 

हज़रत इब्ने अब्बास, हज़रत इब्ने उमर, हज़रते जाबिर, हज़रत अबू सईद खुदरी, अबू वाकिद लैशी और दूसरे असहाबे किराम रज़िअल्लाहु तआला अन्हुम आखिर तक यही कोशिश करते रहे कि, आप मक्का मुअज़्ज़मा से तशरीफ़ ना ले जाएं, *लेकिन यह तमाम कोशिशें आपके इरादे को ना बदल पाईं।*

रास्ते में बतने जिलरमा नामी मक़ाम से रवाना होने के बाद हज़रत अब्दुल्लाह बिन मुतीअ् से मुलाक़ात हुई। उन्होंने भी आपको सफ़र तर्क करने पर इसरार किया। 

          *लेकिन हज़रत इमाम हुसैन ने फ़रमाया:*
          "हमें वही मुसीबत पहुंच सकती है, जो ख़ुदावंदे आलम ने हमारे लिये मुक़र्रर फ़रमा दी"

📚 सूरह इब्राहीम: आयत 27)

क़ाफ़िला जब मक़ामे  शकुक मे पहुंचा तो कूफ़ा से आने वाले *एक आदमी ने हज़रत इमाम हुसैन को बताया कि कूफ़ियों ने बेवफ़ाई की और हज़रत मुस्लिम (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) शहीद कर दिये गये।*

हज़रत इमाम हुसैन यह ख़बर सुनकर गमगीन और आबदीदा हो गए और पढ़ा,

*انا لله وانا اليه راجعون*

आप ने ख़ैमे में आकर ये खबर दी और लोगो की इस पर राय मांगी। क़ाफ़िले वालों ने मुख़्तलिफ़ राय दी, एक दफ़ा आपने भी वापसी का इरादा फ़रमाया। *लेकिन बहुत मशवरे के बाद ये तय किया गया की सफ़र जारी रखा जाए और वापसी का ख़याल तर्क किया जाए।*

📚 सवानहे करबला, मुतर्जम सफ़ह 129)

*सबक👇🏿*

हजरत इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु और आपके अहले बैअ्त सभी हक़ के ख़ातिर कमर कसे हुए थे और उन्हे मौत का कोई डर न था, यज़ीद के फ़िस्क़ व फुजूर के ख़िलाफ़ आवाज बुलंद करने मे उन्हें किसी दुनियावी नुक़सान का  डर नहीं था. आपने अल्लाह तआला की रज़ा के लिए और शरिअते मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम को बचाने के लिए सफ़र जारी रखा,, हम मुसलमानों को भी चाहिए कि जब भी कोई आंच दीने इस्लाम पर आए तो अपनी जान माल को क़ुरबान करने के लिए हमेशा तैयार रहें और नमाज़ रोज़ा यानी मुकम्मल तौर पर शरिअते मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की पाबंदी करें जब ही हम सच्चे हुसैनी कहलाएंगे...........

*इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी अगली पोस्ट में*

*मिन जानिब जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा, गुमला, झारखंड, इंडिया*

*Next........*

*अपने दोस्तों रिश्तेदारों को शेयर करें ताकि वह भी अपने इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/GxA2xefFuyu2yjEWjmlvpu
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

Saturday, August 26, 2023

दास्ताने करबला, क़िस्त-12*

*दास्ताने करबला, क़िस्त-12*

*हज़रत इमाम मुस्लिम के मज़लूम बच्चे*

शैतान इब्ने ज़्याद *हजरत इमाम मुस्लिम रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के* क़त्ल से फ़ारिग हुआ तो उसे पता चला कि इमाम मुस्लिम के दो लड़के भी इसी शहर में हैं। इब्ने ज़्याद ने फ़ौरन ऐलान करा दिया कि जो कोई भी (हज़रत) मुस्लिम के लड़कों को अपने घर मे जगह देगा क़त्ल व गारत किया जायेगा, *उस वक़्त दोनों बच्चे क़ाज़ी शुरैह के घर में थे।* 

*क़ाज़ी शुरैह* साहब ने दोनों बच्चों को सामने बुलाया और बे-इख़्तियार रोने लगे....

*बच्चों ने पूछा :* "आज इस तरह रोने का सबब क्या है...? क्या हम दोनो यतीम तो नहीं हो गये..?

*क़ाज़ी साहब ने फ़रमाया :* "बच्चों, अल्लाह तआला तुम्हे सब्र अता फ़रमाये, वाक़ई तुम दोनों यतीम हो गये हो।"

बच्चों ने यह ख़बर सुनी तो रोने लगे, क़ाज़ी साहब ने कहा : *बच्चों ! चुप रहो इब्ने ज़्याद के आदमी तुम्हारी तलाश में हैं,* 
मुझे तुम्हारी और अपनी जान का ख़ौफ है मै चाहता हुं कि तुम्हे किसी के साथ मदीना शरीफ़ रवाना कर दूं।,

क़ाज़ी साहब ने अपने लड़के असद से कहा कि *आज एक क़ाफ़िला दरवाज़ा ए इराक़ैन से मदीना शरीफ़ को जा रहा है, तुम इन दोनों बच्चों को किसी नेक आदमी के सुपुर्द कर आओ, ताकि, वह उन्हें मदीना शरीफ़ पहुंचा दे।*

असद जब उन्हें लेकर दरवाज़ा ए इराक़ैन आया तो *क़ाफ़िला रवाना हो चुका था।* दूर धूल उड़ती हुई नज़र आ रही थी, असद ने बच्चों से कहा कि क़ाफ़िला अभी अभी यहां से गुज़रा है, दौड़कर उससे मिल जाओ, *बेकस बच्चे क़ाफ़िले की तरफ़ दौड़ पड़े मगर क़ाफ़िला दूर जा चुका था इसलिए क़ाफ़िले को न पा सके।* 

असद घर को वापस आ चुका था अंधेरी रात थी बच्चे रास्ता भूल गये, रात भर इधर-उधर फिरते रहे, *सुबह होने लगी तो एक पानी का चश्मा देखा, थके हुए थे इसलिए चश्मे के पास बैठ गये,* इत्तेफ़ाक़न एक ग़ुलाम उस चश्मे पर पानी भरने आई, उन्हें देखा और जब उसे मालूम हुआ कि यह हज़रत इमाम मुस्लिम रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के यतीम बच्चे हैं तो वह रोने लगी।

और कहा : "साहिबज़ादों मेरे साथ चलो मेरी मालिका अहले बैअ्त से मुहब्बत करने वालों में से है। वह तुम्हें पाकर बहुत खुश होगी, बिल्कुल न घबराओ और मेरे साथ चलो।" 

बच्चे हैरान व परेशान उसके साथ हो लिए। जब घर पहुंचे तो घर की मालकिन यह मालूम करके कि *ये हज़रत मुस्लिम रज़िल्लाहु तआला अन्हु के यतीम बच्चे हैं,* दौड़ी और दोनो को सीने से लगाया और उनके हाले ज़ार पर रोने लगी और फिर खिला-पिलाकर एक कमरे मे सुला दिया..!

यह औरत तो ख़ुदा परस्त और मुहिब्बे अहले बैअ्त थी, लेकिन *उसका खाविन्द *हरीस नामी ख़ुदा ए तआला का नाफ़रमान और दुश्मने अहले बैअ्त था,* दिन भर इन्हीं बच्चों की तलाश में घूमता रहता था कि बच्चे मिल जायें तो उनका क़त्ल करके उनका सर इब्ने-ज़्याद के पास ले जाकर इनाम पाऊं.?

रात को जब  ये ज़ालिम घर आया तो उसकी बीवी डरी के कहीं इसे इन बच्चो का इल्म न हो जाए। 
*चुनांचे:* उसकी बीवी ने उसे जल्दी-जल्दी खाना खिलाकर सो जाने को कहा वह ज़ालिम दिन भर का थकामांदा था सो गया,

कुछ रात गये बड़े बच्चे ने छोटे को जगाया और अपना देखा हुआ ख़्वाब सुनाया। फिर दोनों बाप की याद में एक दूसरे को चिमटकर रोने लगे,

*उनके रोने से हरीस की आंख खुल गई .......*
बीवी से पुछा  ये शोर कैसा ...? वह औरत सहम गई और दौड़ी कि ख़ुदा जाने अब क्या होगा..?

हरीस उठा और चिराग़ जलाकर अंदर आया तो उन दोनो यातीमों को रोते देखकर बोला तुम कौन हो...
*उन साहिबज़ादों ने साफ़ कह दिया कि हम फ़रज़न्द-ए-हज़रत मुस्लिम है, ज़ालिम हरीस खुश हो गया।*

फिर ये ज़ालिम उन साहिबज़ादों को घसीटते हुए बाहर लाया औरत बेचारी बहुत हाथ पैर मारती रही, अपना सिर उसके पैरों पर रखती रही और उसे ज़ुल्म से रोकती रही मगर उस ज़ालिम ने एक न सुनी, *बेरहम तलवार लेकर उठा और दोनों को नहरे फ़ुरात की तरफ़ लेकर चला और उनको क़त्ल करने के लिए तैयार हो गया।*

🩸 ज़ालिम बेरहम हरीस ने तलवार पकड़ ली उस वक़्त बच्चों ने कहा : "हम यतीम हैं, बे वतन हैं, हम पर रहमकर।" 

🩸 मगर उस दुनियां के ज़ालिम कुत्ते ने एक न सुनी और ज़ालिम ने बड़े साहिबज़ादे को पहले शहीद किया फिर देखते ही देखते छोटे को भी शहीद कर दिया...........

*انا لله وانا اليه راجعون،*

 *📘तज़किरा-ए-हुसैन, सफ़ह-48)* 

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी अगली पोस्ट में)*

*मिन जानिब जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा, गुमला, झारखंड, इंडिया*

*Next........*

*अपने दोस्तों रिश्तेदारों को शेयर करें ताकि वह भी अपने इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/GxA2xefFuyu2yjEWjmlvpu
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

Friday, August 25, 2023

अल्लाह तआला के 99 नाम और उनका मतलब

अल्लाह तआला के 99 नाम और उनका मतलब

01- अल्लाह (सबसे बड़ा नाम)
02- अर रहमान (बहुत रहम वाला)
03- अर रहीम (बहुत बड़ा मेहरबान)
04- अल मलिक (हक़ीक़ी बादशाह )
05- अल कुद्दूस (बहुत ज़्यादा पाक)
06- अस सलाम (सलामती वाला)
07- अल मुअमिन (अमन देने वाला)
08- अल मुहैमिन (निगहबान)
09- अल अज़ीज़ (इज़्ज़त के काबिल)
10- अल जब्बार (ज़बरदस्त)
11- अल मुतकब्बिर (बड़ाई वाला)
12- अल ख़ालिक़ (पैदा करने वाला)
13- अल बारी (सूरत बनाने वाला)
14- अल मुसव्विर (सूरत देने वाला)
15- अल गफ़्फ़ार (बड़ा बख़्शने वाला)
16- अल कह्हार (क़हर करने वाला)
17- अल वह्हाब (बहुत ज़्यादा देने वाला)
18- अर रज़्ज़ाक (रोज़ी देने वाला)
19- अल फत्ताह (खोलने वाला)
20- अल अलीम (जानने वाला)
21- अल काबिज़ (कब्ज़ा करने वाला)
22- अल बासित (फ़र्राखी देने वाला)
23- अल ख़ाफ़िज़ (गिराने वाला)
24- अर राफ़िअ (उठाने वाला)
25- अल मुइज़ (इज़्ज़त देने वाला)
26- अल मुज़िल (ज़लील करने वाला)
27- अस समीअ (सुनने वाला)
28- अल बसीर (देखने वाला)
29- अल हकम (फ़ैसला देने वाला)
30- अल अद्ल (इंसाफ करने वाला)
31- अल लतीफ़ (नरमी करने वाला)
32- अल ख़बीर (ख़बर रखने वाला)
33- अल हलीम (बुर्दबार)
34- अल अज़ीम (बहुत बड़ा)
35- अल ग़फ़ूर (बार बार बख़्शने वाला)
36- अश शकूर (बहुत अज्र देने वाला)
37- अल अली (बहुत बुलन्द)
38- अल कबीर (बहुत बड़ा)
39- अल हफ़ीज़ (संभालने वाला)
40- अल मुकीत (रोज़ी देने वाला)
41- अल हसीब (हिसाब लेने वाला)
42- अल जलील (बुज़ुर्गी वाला)
43- अल करीम (बड़ा सख़ी)
44- अर रक़ीब (निगहबान)
45- अल मुजीब (दुआ कुबूल करने वाला)
46- अल वासिअ (कुशादगी वाला)
47- अल हक़ीम (हिकमत वाला)
48- अल वदूद (भलाई चाहने वाला)
49- अल मजीद (बड़ी शान वाला)
50- अल बाइस (उठाने वाला)
51- अश शहीद (गवाह)
52- अल हक़ (सच्चा और साबित)
53- अल वकील (कारसाज़)
54- अल क़वी (ताक़तवर)
55- अल मतीन (ज़बरदस्त क़ुव्वत वाला)
56- अल वली (मददग़ार)
57- अल हमीद (तारीफ़ किया गया)
58- अल मुह्सी (गिनती करने वाला)
59- अल मुब्दी (पहले पहल पैदा करने वाला)
60- अल मुईद (दोबारा पैदा करने वाला)
61- अल मुहयी (ज़िन्दा करने वाला)
62- अल मुमीत (मारने वाला)
63- अल हैय् (हमेशा ज़िन्दा रहने वाला)
64- अल कय्यूम (दुनिया क़ायम रखने वाला)
65- अल वाजिद (हर चीज़ को पालने वाला)
66- अल माजिद (बड़ी इज़्ज़त वाला)
67- अल वाहिद (अकेला)
68- अल अहद (एक)
69- अस समद (जो किसी का मोहताज न हो)
70- अल क़ादिर (क़ुदरत रखने वाला)
71- अल मुक़्तदिर (पूरी क़ुदरत रखने वाला)
72- अल मुक़द्दिम (आगे करने वाला)
73- अल मुअख्खिर (पीछे करने वाला)
74- अल अव्वल (सबसे पहले)
75- अल आख़िर (सब के बाद)
76- अज़्ज़ाहिर (सब पर ज़ाहिर)
77- अल बातिन (सबसे पोशीदा)
78- अल वाली (हक़ीक़ी मालिक)
79- अल मुतआली (बहुत ही बुलन्द)
80- अल बर्र (तमाम नेकी के जरिया)
81- अत तव्वाब (तौबा क़ुबूल करने वाला)
82- अल मुन्तकिम (इन्तिक़ाम लेने वाला)
83- अल अफूव (दरगुज़र करने वाला)
84- अर रऊफ (शफ़क़त करने वाला)
85- मालिकुल मुल्क (बादशाहत का मालिक)
86- जुल जलालि वल इकराम (इज़्ज़त और बुलंदी अता करने वाला)
87- अल मुक़सित (इंसाफ़ करने वाला)
88- अल जामिअ (जमा करने वाला)
89- अल ग़नी (किफ़ायत करने वाला)
90- अल मुग़नी (बेपरवाह करने वाला)
91- अल मानिअ (रोकने वाला)
92- अज़ ज़ार (नुकसान पहुँचाने वाला)
93- अन नाफ़िअ (नफ़ा पहुँचाने वाला)
94- अन नूर (मुनव्वर करने वाला)
95- अल हादी (रास्ता दिखाने वाला)
96- अल बदीअ (बेमिसाल पैदा करने वाला)
97- अल बाक़ी (बाक़ी रहने वाला)
98- अल वारिस (हक़ीक़ी वारिस)
99- अर रशीद (सीधी राह दिखाने वाला)

बेशक अल्लाह ही सारी कायनात चलाने वाला है

हजरत उस्माने गनी رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْہ

*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْم* 
 *اَلصَّلٰوةُ وَالسَّلَاْمُ عَلَيْكَ يَاْ رَسُوْلَ اللّٰه(ﷺ)*
🌸हजरत उस्माने गनी رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْہ
*मख्ज़्ने जूदो सखा पैकरे हिल्मो हया साहिबे तस्लीमो रिज़ा ज़ाहिदे बे रिया अहले हया का पेशवा पेशवाए अग्निया ताजदारे अतकिया दामादे मुस्तफा महबूबे लम यज़ल आशिके हुस्ने अज़ल कौकबे फलके महब्बत शनावरे बहरे शराफत शहेसवारे मैदाने शराफत वाकिफे रमज़े हक़ीक़त आबरुए दीने मतीन नामूसे इस्लाम कामिलिल हयाई वल ईमान जामिइल क़ुरआन इमामे मज़लूम उस्मान इब्ने अफ्फान रदियल्लाहो तआला अन्हू
अमीरुल मोमिनीन सय्यिदना उस्मान इब्ने अफ्फान रदियल्लाहो अन्हू का नसब इस तरहा है उस्मान बिन अफ्फान बिन अबिल आस बिन बिन उमय्या बिन अब्दे शम्स बिन  अब्दे मनाफ़ हुज़ूर अलैहिस्सलाम और हज़रत उस्मान का नसब अब्दे मनाफ़ पे जाकर मिल जाता है 
आपकी कुनियत अबू अब्दुल्लाह है और लक़ब ज़ुन्नूरैन और ग़नी हैं 
आपकी विलादत वाकिया फील के 6 साल बाद हुई आपका बचपन बहुत पाकीज़ा गुज़रा  
हज़रत अबू हुरैरा रवायत करते हैं नबी अलैहिस्सलाम ने फरमाया हर नबी का जन्नत में एक रफ़ीक़ होगा और मेरा रफ़ीक़ उस्मान है ( सुनने इब्ने माजा सफा 11 ) 
मेरी सारी उम्मत में सबसे ज़्यादा हयादार हज़रत उस्मान बिन अफ्फान हैं ( नुरुल अबसार सफा 71 ) 
उस्मान बिन अफ्फान दुनियां ओ आख़िरत में मेरा दोस्त है ( सवाइके मुहरिका सफा 109 )
उस्मान ग़नी रदियल्लाहो अन्हू की शफ़ाअत से 70 हज़ार ऐसे लोग जन्नत में बग़ैर हिसाब के दाखिल होंगे जिन पर दोज़ख की आग वाजिब हो चुकी होगी ( सवाइके मुहरिका 108 )
अल्लामा इब्ने ज़ौजी के हवाले से अल्लामा शबलनजी ने लिखा है के हज़रत इमाम हसन से रिवायत है उन्होंने कहा मैं हज़रत उस्मान के वक़्ते दफन मौजूद था उनके खून आलूद कपड़ो में ही उनको दफन कर दिया गया
हज़रत उस्मान की 10 खसलतें जो अल्लाह के यहां महफूज़ हैं
1 आप इस्लाम लाने में 4 नम्बर पर हैं
2 हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने एक बाद दीगर बेटी आपके निकाह में दी
3 आपने कभी गाने बजाने की महफ़िल में शिरकत नहीं कि
4 आप कभी लअबो लहब में कभी मशगूल नही हुए
5 आपने कभी बुराई और बदी की तमन्ना नही की
6 आपने हुज़ूर से बैअत होने के बाद अपना सीधा हाँथ शर्म गाह को नही लगाया
7 इस्लाम लाने के बाद आपने हर जुमा को 1 गुलाम आज़ाद किया गरचे उस वक़्त मुम्किन ना हुआ तो बाद में किया
8 आप ज़माना जाहिलियत में और अहदे इस्लाम मे कभी ज़िना के मुरतकिब नही हुए
9  दौरे जिहालत और अहदे इस्लाम मे आपने कभी चोरी नही की
10 रसूले करीम के ज़माने के मुताबिक आपने क़ुरआन जमा किया
( तारीखुल खुल्फा सफा 247  )
🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

सात शख्स हैं जिन पर अल्लाह तआला साया करेगा

हदीस -: सही मुस्लिम शरीफ में अबू हुरैरा रदियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं " अल्लाह तआला को सब जगह से ज़्यादा महबूब मस्जिदें हैं और सबसे ज़्यादा मबगूज़ (बुरी जगहें ) बाज़ार हैं "* और इसी के मिस्ल जुबैर इब्ने मुतइम व अब्दुल्लाह इब्ने उमर व अनस इब्ने मालिक रदियल्लाहु तआला अन्हुम से मरवी है और बाज रिवायत में है कि यह कौल अल्लाह तआला का है यानी हदीसे कुदसी है।
हदीस -: बुखारी व मुस्लिम वगैरहुमा उन्हीं से रावी कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं सात शख्स हैं जिन पर अल्लाह तआला साया करेगा उस दिन कि उसके साये के सिवा कोई साया नहीं।
1).आदिल इमाम यानी सही इन्साफ करने वाला इमामे बरहक़।
2).और वह ज़वान जिसकी परवरिश अल्लाह तआला की इबादत में हुई।
3).वह शख्स जिसका दिल मस्जिद को लगा हुआ है।
4). और वह दो शख्स कि आपस में अल्लाह तआला के लिए दोस्ती रखते हैं उसी पर जमा हुए उसी पर जुदा हुए।
5). और वह शख्स जिसे किसी मालदार और हसीन औरत ने बुलाया उसने कह दिया मैं अल्लाह से डरता हूँ।
6). और वह शख्स जिसने कुछ सदक़ा किया और उसे इतना छुपाया कि बाएं को खबर न हुई कि दाहिने ने क्या खर्च किया।
7). वह शख्स जिसने तन्हाई में अल्लाह तआला को याद किया और आँखों से आँसू बहे।
( बहारे शरिअत हिस्सा 3, सफा 146 )
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

नमस्ते और नमस्कार के मााइने

ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴ

नमस्ते और नमस्कार के माइने आदाब, तस्लीम सलाम करना वगैरा के होते है उलमा फरमाते है कि मुसलमान काफिर को नमस्ते कहे, ये हराम है और काफिर के यहां ये शियारे ताज़ीम है और खास शियारे हिनूद है तो किसी काफिर को नमस्ते नहीं करना चाहिए क्योंकि जब हदीस में फासिक की ताज़ीम को मना किया तो काफिर की ताज़ीम की कैसे इजाज़त होगी इस्लाम ने मुसलमानों को आपस में मिलते वक़्त सलाम की तर्गीब दी और हुज़ूर ﷺ ने काफिर और फासिकों और गैरों के तरीके से बचने का हुक्म दिया

आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत रहमतुल्लाहि तआ़ला अ़लैह फरमाते है: काफिर को सलाम हराम है। और आगे लिखते है काफिर या फासिक को सलाम करने की सही ज़रूरत पेश आए तो लफ़्ज़े सलाम ना कहे ना कोई ऐसा लफ़्ज़ जो ताज़ीमी हो। मज़बूर हो तो आदाब कहे (यानी आ मेरे पाऊँ दाब) और मज़बूरी की हालत में आदाब कहते वक़्त भी दिल में उनकी ताज़ीम की निय्यत नहीं होनी चाहिए  
         📚बा हवाला📚
{फतावा ताजुश शरीआ जिल्द 2 सफा 112 ,फतावा रज़विया जिल्द 22 सफा 378}
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃

Thursday, August 24, 2023

दास्ताने करबला, क़िस्त-11*

*दास्ताने करबला, क़िस्त-11*

*हज़रत मुस्लिम बिन अक़ील की शहादत*

हज़रत इमाम मुस्लिम रज़िअल्लाहु तआला अन्हु जब कूफ़ा पहुंचे तो बेवफा कूफ़ियों ने आपके हाथ पर बैअत करके फिर आप से मुंह मोड़ लिया और आपका साथ छोड़ दिया, *आप तन्हा रह गये, रात का वक़्त था इब्ने ज़्याद ने आपकी गिरफ़्तारी के लिये शहर के चारो तरफ़ कड़ी निगरानी कर दी।*

हज़रत इमाम मुस्लिम भूके-प्यासे एक मस्जिद मे बैठे रहे रात को बाहर निकले, रास्ते का इल्म न था दिल मे कहते थे अफ़सोस हुसैन से छूटे और दुश्मन में घिरे न कोई हमदम है कि राज़े दिल सुने *ना कोई क़ासिद है कि हुसैन को ख़बर करे। (रज़िअल्लाहु तआला अन्हुमा)* 

इसी तरह हैरान और परेशान एक मुहल्ले मे फिर रहे थे, वहां एक बुढ़िया तौआ नामी को देखकर उससे पानी तलब फ़रमाया तो उसने पानी दिया।  यह मालूम करके कि यह *ग़रीबुल वतन* मुस्लिम हैं। बुढ़िया ने आपको अपने घर मे जगह दी, लेकिन उस बुढ़िया का बेटा इब्ने ज़्याद का आदमी था।  उसने इब्ने ज़्याद को ख़बर दे दी कि, हज़रते मुस्लिम हमारे घर मे हैं। 

*इब्ने ज़्याद ने अपनी फौज भेज दी, जिसने बुढ़िया के मकान को घेर लिया और चाहा की हज़रत मुस्लिम  को गिरफ़्तार कर लें।*
इमाम मुस्लिम को जब इस बात का पता चला तो आप तन्हा तलवार लेकर इब्ने ज़्याद के लश्कर पर टुट पड़े, जैसे शेर बकरियों के झुंड पर हमला आवर होता है। आपके हमले से उनके दिल दहल गए और बहुत आदमी ज़ख्मी हुए और बहुत से मारे गए। 

अब इन ज़ालिमों ने मुक़ाबले की तरक़ीब बदल दी और *सामने से आकर मुक़ाबला करने के बजाय दर व दिवार पर चढ़कर  पत्थर बरसाने शुरू कर दिये जिस से हज़रत मुस्लिम का बदने मुबारक खस्ता हो गया।* एक पत्थर आपकी पेशानी पर लगा, एक पत्थर आकर आपके होठों पर लगा जिनसे खून जारी हो गया, दाढ़ी और बदन मुबारक लहू लुहान हो गया, तो अब मजबूर होकर एक दिवार से तकिया लगाकर बैठ गये कि एक नामर्द ने घर  मे आकर तलवार आपके सर पर मारी जिससे उपर का होठ कट गया, आपने इसी हाल मे उस बुज़दिल को जहन्नम रशीद कर दिया और फिर दीवार से तकिया लगाकर बैठ गये, 
*अर्ज़ करने लगे :* ईलाही ! मैं इस वक़्त प्यासा हुं। 

🩸आपकी फ़रियाद सुनकर वही बुढ़ीया घर से पानी लाई और आपको दिया आपने मुंह से लगाया मगर उसमे खुन मिल गया इसलिए आपने नहीं पिया, बुढ़ीया ने दोबारा दिया वह भी खून आलुदा हो गया, तीसरी बार उसमे आपके दांत निकलकर गिर पड़े, आपने प्याला हाथ से रखकर फरमाया -
"ख़ुदा को मंज़ूर ही नहीं"

फिर खड़े हुए, पीछे से किसी ने नेज़ा मारा जो पीठ के पार हो गया ज़ालिमों ने दौड़कर आपको पकड़ लिया और *आपको इब्ने ज़्याद के पास ले गये, इब्ने ज़्याद बद निहाद ने हुक्म दिया कि इन्हें छत पर ले जाकर क़त्ल कर दो,*

*चुनांचे :* एक ज़ालिम इब्ने बुकैर ने आपका हाथ पकड़ कर आपको छत पर ले गया, हज़रत मुस्लिम दुरूद शरीफ़ पढ़ते जाते और कहते जाते थे.
*अल्ला हुम्मा हकुम बैनना व बैना क़ौमिना बिल हक़,*

जब छत पर पहुंचे तो नीचे देखा की अहले कूफ़ा जमा होकर देख रहे हैं है।,
*आपने फ़रमाया :*

*"ऐ कूफ़ियों जब मेरा सर तन से जुदा किया जाये तो बदन दफ़न करना और कपड़े उतारकर जो काफ़िला मक्का ए मुअज़्ज़मा जाता हो हुसैन के पास भेज देना और मेरे बच्चो पर रहम करना, फिर मक्के की तरफ़ रुख़ कर के कहा*

*भाई यहां की आपको कैसे ख़बर करे*
*हरगिज़ इधर को आप न अज़्मे सफ़र करें..!!*

*इतने मे ज़ालिम क़ातिल ने आपका सरे मुबारक तने अतहर से जुदा कर दिया.......…..*

*(अल्लाहु अकबर)*
-

*इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन*

शहीद मुस्लिम बेकस हुए हज़ार अफ़सोस.
फरिश्ते करते हैं इस गम पे बार बार अफसोस..
शकी ने कुछ भी न ग़ुरबत का उनकी पास किया.
चलाई हलक़ पे शमशीरे आबदार अफ़सोस..?

*सबक़*

दुनियादार नशा-ए-दुनिया में बदमस्त होकर अल्लाह वालों पर इन्तिहाई ज़ुल्म व सितम पर उतर आते ते हैं।, लेकिन अल्लाह वालों के पाए इस्तिक़लाल मे लग्ज़िश नही आती, मालूम हुआ कि यह सारे ज़ुल्म व सितम ढाने वाले बड़े ही झूटे और बुज़दिल होते हैं, ये लोग ज़ाहिर में मुहब्बत वाले दिखते थे, लेकिन बातिन मे दुश्मन होते हैं...!! इनके दिलों में अहले बैत की मुहब्बत के बजाय बुग़्ज़, कीना, और अदावत होती है। 

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी अगली पोस्ट में)*

*Next........*

*अपने दोस्तों रिश्तेदारों को शेयर करें ताकि वह भी अपने इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/GxA2xefFuyu2yjEWjmlvpu
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

Tuesday, August 22, 2023

सफेद बालो का उखाड़ना

(  सफेद बालो का उखाड़ना  ) 

सफेद बालों का चूनना मकरूह है. है हजरत अम्र बिन सुर्यब ने अपने वालिद से और उन्हों अपने दादा से रिवायत की है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने सफेद बाल उखाड़ने (चुनने) से मना फरमाया है और फरमाया सफेदी इस्लाम का नूर है, एक और हदीस में आया है कि हुजूर गरामी ने इरशाद फरमायाः सफेद बालों को न निकालो (उखाड़ो) क्यों कि जिस मुसलमान को बहालते इस्लाम लिबासे पीरी पहनाया गया कियामत के दिन (बालों की सफेदी उसके लिए नूर होगी। यहया की रिवायत में आया है कि अल्लाह तआला उसके हर बाल के एवज एक नेकी लिखेगा और एक गुनाह साकित कर देगा बाज तफसीरों में अल्लाह तआला के इस फरमान को व जा अकुम अन्नजीर इसी बात की ताईद में पेश किया गिया है और कहा है कि नजीर से मुराद शैब यानी बुढ़ापा है। सफेद बाल मोत से डराते हैं, मौत की याद दिलाते है,ख्वाहिशाते नपसानी और दुनिया की लज्जतों से रोकते है, आखिरत की तैयारी और दारेबका की सामान फराहम करने पर तैयार करते है। फिर किस तरह ऐसी चीज का दूर करना जायज हो सकता है? सफेद चुनने वाला तकदीर से मुकाबला करना चाहता है, अल्लाह के कामों में दखल दे कर उसकी ना खुशी हासिल करता है, जवानी की ताजगी और नौ उमरी को हमेशा की ताज़गी और बुजुर्गी पर तरजीह देना चाहता है। बुजुर्गी, बुर्दबारी और इस्लाम के नूरानी लिबास और इब्राहीमी शिआरे जिस्मानी से नफरत करता है। *बाज कुतुब में मंकूल है कि सबसे पहले हालते इस्लाम में सफेद बाल हजरत इब्राहीम के हुए थे* आका हजरत सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की हदीस है: अल्लाह
तआला बूढ़े आदमी से शर्म करता है यानी उसे अजाब देने में हया फरमाता है।
*(गुनियतुतालिबीन पेज नम्बर 95)*💓
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴