Monday, August 21, 2023

दास्तानें करबला, क़िस्त-10*

*दास्तानें करबला, क़िस्त-10*

*जल्लाद इब्ने ज़्याद*

*जब इब्ने ज़्याद को पता चला की मुस्लिम (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) को हानी ने पनाह दे रखी है, तो उसने अपनी फौज भेजकर हज़रत हानी को गिरफ़्तार कर लिया और इस तरह कूफ़ा के दूसरे रुऊसा (अमीर) और लीडरों को भी किले मे बंद कर लिया....*

*हजरत इमाम मुस्लिम रज़िअल्लाहु तआला अन्हु* को इस सूरते हाल का पता चला, तो आपकी रगे हाशमी जोश में आई। आप ने अपने दोनो बच्चों को *काज़ी-ए-शहर* के घर रवाना करके अहले बैअत से मुहब्बत रखने वालों को जमा किया....तो *उन लोगो ने मिलकर शाही महल जिसमें कूफ़ा के लीडर क़ैद थे उस को घेर लिया।* 

*क़रीब था कि, इब्ने ज़्याद और उसके साथी गिरफ़्तार हो जाते*, लेकिन इब्ने ज़्याद ने एक चाल चली, वह यह की उसने कूफ़े के जिन जिन बड़े आदमियों को किले में क़ैद कर रखा था.... उन्हें मजबूर किया कि मुस्लिम (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) से अलग हो जाये। यह लोग इब्ने ज़्याद के क़ैद मे थे और जानते थे कि, अगर लोगों ने क़िले पर हमला किया और इब्ने ज़्याद को अगरचे शिकस्त हुई, फिर भी वह क़िला फ़तह होने तक उनका ख़ात्मा कर देगा। 

इस खौफ से वह घबरा उठे और क़िले की दीवार पर चढ़कर चिल्लाये कि......

*"भाईयों ! हज़रत मुस्लिम की हिमायत तुम्हारे लिए खतरनाक है, हुकुमत तुम्हारी दुश्मन हो जाएगी, यजीद तुम्हारे बच्चे बच्चे को मरवा डालेगा, तुम्हारे माल लुटवा देगा, तुम्हारी जागीरें और मकान ज़ब्त हो जायेंगे,* और अगर तुम इमाम मुस्लिम के साथ रहे तो देखो हम जो इब्ने ज़्याद की क़ैद में हैं क़िले के अंदर ही मारे जाएगें। अपने अंजाम पर नज़र डालो, हमारे हाल पर रहम करो और अपने घर चले जाओ"

इब्ने ज़्याद की यह चाल कामयाब रही और इमाम मुस्लिम का लश्कर बिखरने लगा। *सब बेवफाई पर उतर आये हज़रत इमाम मुस्लिम का साथ छोड़ने लगे हत्ता कि शाम तक हजरत मुस्लिम के साथ सिर्फ पांच सौ (500) की तअ्दाद रह गयी* 

🌒 गुरूबे आफताब के बाद जब अंधेरा हुआ तो वह भी साथ छोड़ गये और इमाम मुस्लिम तन्हा रह गये..........

📗सिर्रूश्शहादतैन, सफ़ह-16, 
📘सवानेह करबला सफ़ह-5, 
📗तज़किरा-ए-हुसैन सफ़ह-36)

    *सबक़*
*हजरत इमाम हुसैन* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु  और अहले बैअ्त की मुहब्बत व वफ़ा के इन दावेदारो के सारे वादे झूठे थे यह लोग वक़्त पर बेवफा साबित हुए।

👉🏼 मालूम हुआ कि अहले बैअत की मुहब्बत का दावा करने वाला हर दावेदार सच्चा नहीं होता बल्कि कुछ गद्दार भी होते हैं.......

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी अगली पोस्ट में)*

*मिन जानिब जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा गुमला झारखंड इंडिया*

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*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

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*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
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अगर से मोहब्बत है**ज़रूर पढ़े*

*अगर अल्लाह से मोहब्बत है*
*ज़रूर पढ़े*




          
                      *Tibbe-nbvi.*





*जो लोग खाने से पहले थोड़ा नमक चख लें  वो लोग 30; किस्म कि बीमारियों से मेहफूज रहते हें* 



*खजूर को नाश्ते में इस्तेमाल करो ताकि तुम्हारे अंदुरानी जिरासीम का खात्मा हो जाये* 



*ग़म का शिकार हो तो खीर खा लिया करो* 




*जुकाम से मत घबराओ ये तुम्हे जूनून से महफूज़ रखता हे* 



*कलोन्जी में मौत के सिवा हर बीमारी का इलाज हे* 




*आँख का दुखना अंधे होने से बचाता हे* 



*खाँसी के होने से फालीज से हिफाज़त रहती हे* 



*एक बार दुरूद पढ़कर अपने दोस्तों को भेजो* 



*"जेतून"के  तेल में 76.बीमारियों का इलाज हे* 




*"आब-ए-ज़म ज़म"हर बीमारी का इलाज हे* 
 



*"अनार" में जन्नत के पानी का एक क़तरा होता हे* 




*जिस घर में खजूर हो वो घर वाले कभी भूके नहीं रहेंगे* 




*"अज़ान" का एक जुमला सुनकर उसे दोहरायें तो उसके नाम-ए-अमाल दो लाख नेकिया लिख दी जाती हें* 




*जो सुनकर दूसरे को बताये तो उसके नाम-ए-अमाल में 30.लाख नेकिया लिख दी जाती हें* 




*क़यामत के दिन तो इंसान एक एक नेकी को तरासेगा ज़रा इस मेसेज को गोर से समझो अच्छा लगे तो फॉरवर्ड करो* 




     *(वी.आई.पी.तोहफ़ा)*




 *"सुरए यासीन" फजर के बाद पढ़ने से हर ख्वाइश पूरी होती हे* 




*"सुरेए वाकया" मग़रिब के बाद पढ़ने से कभी फाका नहीं होता* 





*"सूरए कौसर" दुश्मनों कि दुश्मनी से बचाती हे* 




*"सूरए काफीरुन" मौत के वक्त कुफ्र से बचाती हे* 




*"सूरए इख़्लास" मुनाफिकात से बचाती हे*




*"सूरए फलक"हादसों से बचाती हे* 



*"सूरए नास"वसवसो से बचाती हे* 





*ये तोहफ़ा दूसरो को भी दें  अल्लाह अफजल तोहफ़ा देने वालो को पसंद करता हे* 





*अल्लाह ने अपने बंदों पे नेमतें कि जिन में 3.ये हें* 






*(1) अनाज में कीडे पैदा किये ताकि अमीर लोग सोने चांदी कि तरह न जमा करे वरना लोग भुके मरते* 




*(2) मौत के बाद मुर्दे के जिस्म में बदबू पैदा कि वरना कोई अपने मेहबूब को दफन न करता* 




*(3) मुसीबत के बाद सब्र ओर सुकून दिया वरना ज़िंदगी कभी खुशगँवार न होती* 





*तो तुम अपने रब कि कौन कौन सी नेमतो को झुठलाओगे*





*ये मेसेज शैतान फॉरवर्ड करने से रोकेगा मगर आप होने न दें ओर सब मोमीनों को सेंड करें* 



 
*"जज़ाक अल्लाह"*





*हुजूर सलल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया मुझे बच्चो कि 5 आदतें पसंद हें* 





*(1)वो रोकर माँगते हे ओर अपनी बात मनवा लेते हें* 





*(2) वो मिट्टी से खेलते हें* 
*(यानी गुरूर खाक में मिलाते हें )* 





*(3) झगड़ते हें फिर सुलह कर लेते हें*
 *(यानी दिल में हसद बुग्ज ओर किना नहीं रखते)*





*(4) ये मिल जुल कर खाते हें ओर खिलाते हें*
 *(यानी जियादा जमा करने कि हिरस नहीं करते)*




 
*(5) मिट्टी के घर बनाते हें ओर खेल कर तोड़ देते हें*
*(यानी ये बताते हें दुनियाँ फ़ानी हे)*

    *बुखारी शरीफ*  





*इस लिये अपने रब के के सामने रोना सीखो ओर अपने रब को मना लो बेशक अल्लाह रब्बूल इज्ज़त 70.माँओ से जियादा मुहब्बत करता हे।* 





*जो शख्स सोते वक्त 21 बार बिस्मिल्ला पढ़ता हे अल्लाह फरिश्तों से कहता हे कि इस की हर साँस बदले नेकीयां लिख दो सुबहान अल्लाह।* 






*आप के मोबाइल में जितने भी मोमीनों के नम्बर हे उन सब को फॉरवर्ड करो ओर देखे आप की वजह से कितने लोग बिस्मिल्ला पढ़ते हैं।* 
*💕फ्रॉम: म 💞*

Saturday, August 19, 2023

दास्तानें करबला, क़िस्त-09*

*दास्तानें करबला, क़िस्त-09*

*हज़रत मुस्लिम बिन अक़ील की कूफ़े को रवानगी,*
 *और बारह हज़ार कूफ़ियों की बैअ्त*

कूफ़ियों के बार बार इसरार पर *इमाम हुसैन* रज़िअल्लाहु त‘आला अन्हु कूफ़ा तशरीफ ले जाने पर आमादा हो गये लेकिन हालात का पता लगाने के लिए आपने पहले अपने चचाज़ाद भाई *हजरत मुस्लिम बिन अकील* (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) को वहां भेजा। हज़रत मुस्लिम से फ़रमाया कि तुम वहां जाकर मेरे लिए कूफ़ियों से बैअ्त लो, अगर उन्होंने बैअत कर ली तो मुझे इत्तिला कर देना मै भी आ जाऊंगा। 

*चुनांचे* : हज़रत मुस्लिम अपने दो कमसिन बच्चो को साथ लेकर रवाना हो गए, इन दो शहज़ादों का नाम मुहम्मद और इब्राहीम था। यह दोनो आपको बहुत प्यारे थे इसलिये यह दोनो भी सफ़र में अपने वालिद बुज़ुर्गवार के साथ हो गये। 

*हजरत मुस्लिम* कूफ़ा पहुंचे तो आप ने मुख़्तार बिन उबैद के मकान पर क़्याम फ़रमाया, आपकी तशरीफ़ आवरी की खबर सुनकर *जुक-दर-जुक* (भीड़----की----भीड़) मखलूक़ आपकी ज़्यारत को आई.....
          .....*बारह हज़ार से ज़्यादा तअ्दाद* मे आपके हाथ पर हज़रत इमामे हुसैन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) की बैअ्त की। 

💌 *हजरत मुस्लिम* ने अहले इराक़ की मुहब्बत व अक़ीदत देखकर हज़रत *इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की जानिब ख़त लिखा* जिसमें यहां के हालात की इत्तिला दी और गुज़ारिश की कि *आप यहां जल्दी तशरीफ ले आएं* ताकि बंदगाने खुदा यज़ीद के नापाक शर्र से महफ़ूज़ रहें और दीने हक़ की ताईद हो....!!

उधर जब *यज़ीद* को इस सूरते हाल का पता चला तो उसने *हाकिमे बसरा - उबैदुल्लाह बिन ज़्याद* को हुक्म भेजा की वह फौरन कूफ़ा पहुंचकर लोगो को इमाम हुसैन की बैअत से रोके और जिन्होंने बैअ्त कर ली है उन्हे तंबीह करे। 

उबैदुल्लाह बिन ज़्याद बड़ा ही *मक्कार और जल्लाद था।* यह ज़ालिम फ़ौरन कूफ़ा पहुंचा और अहले कूफ़ा को जमा करके यज़ीद की मुख़ालिफ़त करने से डराया धमकाया और बड़े-बड़े लालच देकर उन्हें हिमायते हुसैन से रोका और सब पर अपना रोब और दबदबा जमाया। 

*हजरत इमाम मुस्लिम* यह सूरते हाल देखकर रात को *हानी बिन उरवाह* के मकान मे तशरीफ़ ले गए और फ़रमाया: ऐ हानी! मै यहां ग़रीब मुसाफ़िर हुं तू अहले कूफ़ा से खूब वाक़िफ है मैं तेरी पनाह में आया हुं। मुझे अपने मकान मे पनाह दे। 

हानी ने क़ुबूल  किया और एक हुजरा अपने घर का उनके लिए खाली कर दिया,,

*इब्ने ज़्याद* को पता चला कि मुस्लिम को हानी ने पनाह दे रखी है. (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु).............।

📘सिर्रूश्शहादतैन सफ़ह-14, 
📗सवाहने करबला, सफ़ह-53 पास,

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Thursday, August 17, 2023

मख़दूम अशरफ़ जहांगीर शिमनानी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि |

*28 मुहर्रमुल हराम 1445 हिजरी | यौमे उर्स मुबारक |* हज़रत सैयद मख़दूम अशरफ़ जहांगीर शिमनानी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि |

🇮🇳 मुल्क हिंदुस्तान की रूहानी अदालत *किछोछा मुक़द्दसा* में है ! जहां *सुल्तान हज़रत जहाँगीर अशरफ़ सिमनानी अलैहिर्रहमा* का मज़ार मुबारक़ है ! आपने सल्तनत को लात मार दिया था और हज़ारों किलोमीटर का सफ़र करके मुल्क हिंदुस्तान के उत्तरप्रदेश के शहर *किछोछा मुक़द्दसा* में सुकुनत इख्तियार की! आपके मज़ार से कई हज़ार रोग रोज़ शिफ़ा पाते है जिसमें बहुत से हज़रात आसेब ज़दा होते हैं! आपका विसाल *28 मुहर्रम उल हराम* को हुआ ! अग़र कोई आसेब-ज़दा या किसी तरह की तकलीफ़ से परेशान है या दो-चार हो रहा तो वो इस रूहानी अदालत में जाये, *इंशा अल्लाह तआला* उसका मसला हल हो जाएगा ! और इस दरगाह के तीन तरफ़ से *तालाब* है जिसे आप हज़रत ने ही खुदवाया था ! रिवायत मिलती है कि आप *लोटा* लेकर हाथ बढ़ाते और *मक्का शरीफ़* से *आबे-ज़म-ज़म* भर कर इस तालाब में डाल देते
*✍🏻 आफताब आलम साहब मध्य प्रदेश*

Wednesday, August 16, 2023

दास्तानें करबला, क़िस्त-08*

*दास्तानें करबला, क़िस्त-08*

*कूफ़ियों के ख़ुतूत📩*

     

🤝 *हजरत अमीरे मुआविया* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की वफ़ात के बाद यज़ीद तख्त पर बैठा तो *अहले इराक़* को जब मालूम हुआ कि *हज़रत इमाम हुसैन* रज़िअल्लाहु त‘आला अन्हु ने यज़ीद की बैअत नही की.....

           .....और आप मक्का मुअज्जमा तशरीफ़ ले गये हैं तो उन्होंने मुत्तफ़िक़ (एक राय) होकर इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की ख़िदमत मे ख़त भेजना शुरू किये जिसमे इस अम्र का इज़हार था कि *हम अपने जान व माल आप पर क़ुरबान कर देंगे,* आप यहां कूफ़े मे तशरीफ़ लाये, हम आपकी बैअत करके आपके हुक्म से ज़ालिमों से मुक़ाबला करेगें, और आपका हरहाल में साथ देंगे। 

📩 इस तरह के इल्तिज़ा भरे ख़तों का सिलसिला शुरू हो गया और तमाम जमाअतों और फ़िर्को की तरफ़ से *डेढ़ सौ  (150) के क़रीब ख़त हज़रत इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की खिदमत में पहुंचे.*  

*आप कहां तक खामोश रहते*

आप ने कूफ़ा जाने का इरादा किया, लेकिन आप के असहाब और दीगर सहाबियों ने आप को मशवरा दिया कि, *कूफ़ा वाले पहले भी गद्दारी कर चुके हैं.* इसलिए उनका ऐतबार कर के आपका वहां जाना सही नहीं है। बजाय आपके किसी और को भेज कर हालात का जायज़ा लिया जाए। लोगो के मशवरे से आप ने *हज़रत मुस्लिम बिन अक़ील रज़िअल्लाहु तआला अन्हु* को कूफ़ा भेजने का इरादा किया। 

📩आपने उन्हें जवाब दिया की "तुम्हारे खत डेढ़ सौ (150) के क़रीब पहुंचे।  मैं फ़िलहाल अपने चचाज़ाद भाई मुस्लिम बिन अकील को तुम्हारी तरफ़ भेजता हुं। ताकि तुम्हारी सच्चाई का पता चल सके। *तुम अगर वाक़ई मेरा साथ देना चाहते हो तो मेरे नुमांइदे मुस्लिम बिन अकील की बैअत करो।*  जब वह तुम्हारे हाल और सच्चाई की मुझे इत्तिला करेंगे तो मै भी आ जाऊंगा....!!

📚 *सवानहे करबला, सफ़ह-52,*
*📘 तज़किरा-ए-हुसैन, सफ़ह-300, )*

           *सबक* 

*कूफ़ियों की बेवफ़ाई मशहूर होने के बावुज़ूद हज़रत इमाम हुसैन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) ने उनकी दरख़्वास्त पर तवज्जोह इसलिए फरमाई..... ताकि, कल क़ियामत के दिन वह लोग यह न कह सकें कि हम ज़ालिमों से मुक़ाबला और उन से रिहाई के तलबगार थे लेकिन इब्ने अली हुसैन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) ने हमारी किसी दरख़्वास्त पर तवज्जोह नहीं फ़रमाई, हज़रत इमाम आली मक़ाम ने यह तमामे हुज्जत के लिये अपने भाई को कूफ़े भेज दिया, आप अपना फ़र्ज़ अदा करने को तैयार हो गये......…..*

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी अगली पोस्ट में)*

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Monday, August 14, 2023

दास्तानें करबला, क़िस्त-07*

*दास्तानें करबला, क़िस्त-07*

*हज़रत इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की मदीने से हिजरत*  

यजीद को जब इस बात का पता चला की इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने मेरी बैअ्त नही की तो वह भड़क उठा और उसने आमीले मदीना को हुक्म भेजा की इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को *मेरी बैअत पर मजबूर करो वरना उसका सर काटकर मेरे पास भेज दो।*

*हजरत इमाम हुसैन* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को जब इस यजीदी हुक्म का पता चला तो आपने मदीना मुनव्वरा की सुकुनत तर्क फ़रमाकर मक्का मुअज़्ज़मा चले जाने का इरादा कर लिया।  मदीना मुनव्वरा से रवानगी से पहले रात को नाना जान!  *हुजुर सलल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम* के मज़ारे अनवर पर हाज़िर हुए और रो रोकर अर्ज़े हाल करने लगे। फिर रौज़ा-ए-अनवर से लिपटकर वही सो गये, *ख्वाब मे देखा की नाना जान तशरीफ़ लायें हैं।*, 

आपने हज़रते इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को चूमा और सीना ए अक़दस से लगा लिया और फ़रमाया
*"बेटा हुसैन !* अनक़रीब ज़ालिम तुम्हें करबला मे भूखा प्यासा शहीद कर देगें और तुम्हारे मां-बाप और भाई तुम्हारे इंतेज़ार में हैं और बहिश्त तुम्हारे लिए सजाई जा रही है,  उसमें ऐसे दरजाते आलिया हैं जो शहीद हुए बेगैर तुम्हें नही मिल सकते। *जाओ बेटा सब्र व शुक्र से जामे शहादत पीकर मेरे पास आ जाओ,*
*हजरत इमाम हुसैन* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु यह ख्वाब देखकर घर आये और अहले बैत को जमा करके यह ख्वाब सुनाया और मदीने से मक्का जाने का पक्का इरादा कर लिया और फिर अपने बिरादरे बुज़ुर्ग हज़रत इमाम हसन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) के मज़ार पर हाज़िर हुए और कलिमाते रूखसत ज़बान पर लाये। 

फिर मां की क़ब्रे अनवर पर हाज़िर हुए और अर्ज किया :
           *"ऐ अम्मा जान!* यह नाज़ो का पाला तुम्हारा हुसैन आज तुमसे जुदा होने आया है और आखरी सलाम अर्ज़ करता है।,

*कब्रे अनवर से आवाज़ आई:* व अलैकुमुस्सलाम ऐ मज़लूम (मज़लूम उसे कहा जाता है जिस पर ज़ुल्म हुआ हो या होने वाला हो) आप वहां कुछ देर रोते रहे और फिर वापस तशरीफ़ लाये और मक्का मुअज़्ज़मा को रवाना हो गये.....!!

( 📚 *तज़किरा-ए-हुसैन, सफा-27,)* 

*सबक :---हजरत इमाम हुसैन को आपकी अपनी शहादत का इल्म था।* यह आप ही की शान है की इल्म के बावुज़ूद ज़र्रा बराबर भी आपके क़दम नही डगमगाए और शौके शहादत मे कमी नही आई। 

हजरत इमाम हुसैन ने अपनी सीरते पाक से बता दिया  की तालिबे रज़ा ए हक़, मौला की मर्ज़ी पर फ़िदा होती है।  इसी मे उसके दिल का चैन और उसकी हक़ीक़ी तसल्ली है। कभी वहशत (डर) व परेशानी उसके पास नही फटकती बल्के वह इंतेज़ार की घड़ियां शौक के साथ गुज़ारता है और वक़्ते मुक़र्ररा का बेचैनी से इंतेजार करता है.............

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाकी आने वाली पोस्ट में*

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Saturday, August 12, 2023

73 Firke in Islam

दास्ताने करबला, क़िस्त 06*

*दास्ताने करबला, क़िस्त 06*

*हज़रत अमीरे मुआविया की वफ़ात और यज़ीद की सल्तनत*

हज़रत अमीरे मुआविया के ज़माने में ही हज़रत इमामे हुसैन की ख़िदमत में *कूफा वाले दरख्वास्त भेज रहे थे, और आपको कूफ़ा आने के लिए इसरार कर रहे थे।* लेकिन आप ने उनकी दरख्वास्त और इल्तिज़ा को क़ुबूल ना किया और साफ़ इनकार कर दिया। 

*हज़रत अमीरे मुआविया (रज़िअल्लाहु तआला अन्ह ) की वफात रजब सन 60 हिजरी में दमिश्क में हुई।* आपने लक़्वा में मुब्तिला हो कर वफ़ात पाई। 

आपकी वफ़ात के बाद मुआहदे (agreement) के ऐतबार से *खिलाफ़त दोबारा उम्मत की तरफ़ लौटा देने का अहद था।* और उम्मत का हक़ था कि, वह अपना ख़लीफ़ा ख़ुद चुन लेती। लेकिन यज़ीद जानता था कि, अगर चुनाव के जरिए ख़लीफ़ा  मुंतखब किया गया तो वह ज़रूर इमाम हुसैन ही होंगे।

इसलिए हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के वफ़ात के बाद *वह तख़्ते सल्तनत पर बैठ गया* और अपनी बैअ्त लेने के लिये अतराफ़ (आस पास) और दूसरे मुल्कों में मकतूब रवाना किए। 

मदीना ए मुनव्वरा का आमिल जब यज़ीद की बैअ्त लेने के लिये हज़रत इमामे हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की खिदमत में हाजिर हुवा तो *आप ने उसके फिस्क़ और ज़ुल्म के सबब उसको ना-अहल (illigal) करार दिया और बैअ्त से इन्कार फ़रमा दिया।* इसी तरह हज़रत ज़ुबैर रज़िअल्लाहु तआला अन्ह ने भी इन्कार किया। 

आप हज़रात जानते थे कि, बैअ्त का इन्कार यज़ीद की दुश्मनी का बाईस (सबब) होगा, और वह *आपकी जान का दुश्मन और खून का प्यासा हो जाएगा।* लेकिन आपको गवारा ना हुवा की, अपनी जान की ख़ातिर मुसलमानों की तबाही और शरअ व अहकाम की बेहुर्मती करने वाले शख्स की बैत को कुबूल कर लें।

हज़रते इमामे हुसैन व इब्ने ज़ुबैर रज़िअल्लाहु तआला अन्हुमा से बैअ्त की दरख्वास्त *इस लिये पहले की गई थी की तमाम अहले मदीना इन का इत्तिबाअ करेंगे,* लेकिन इन हज़रात के इनकार से *वो मन्सूबा ख़ाक मे मिल गया* और यज़ीदियों में उसी वक़्त से आतिशे इनाद भड़क उठी

 _*ये वाक़या 4 शाबान सी 60 हिजरी का है.......... ‌‌*_

(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाक़ी आने वाली पोस्ट में)

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दास्ताने करबला, क़िस्त 05*

*दास्ताने करबला, क़िस्त 05*

*इमामे हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु* ने जो वक़्ते विसाल गुमान किया था कि क़ौम के कुछ लोग मुझे अपने नाना जान *हुज़ूर ﷺ* के कदमे मुबारक में दफ़्न होते हुवे रोकेंगे, वैसा ही हुआ... *मरवान जो कि मुस्लिम की शक्ल में एक ख़ारजी और मुर्तद शख्स था, इनकार करने लगा, और रिवायत में येह भी आता है कि मरवान के लोगो ने आप के जिस्मे मुबारक पर तीर भी चलाए*

*हज़रत इमामे हुसैन* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु और आपके हमराही भी उनके मुक़ाबले के लिये हथियार ले कर खड़े हुए।  

जब हज़रते अबू हुरैरह रज़िअल्लाहु तआला  अन्हु ने देखा की, आपस में जंग शुरू होने की तैयारी है, *तो आप ने हज़रते इमामे हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को अपने भाई की वसियत याद दिलाई (की इमामे हसन ने कहा था कि एतराज करने वालो से तकरार मत करना )*

 हज़रत इमामे हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु वापस हो गये और इमामे हसन-ए-मुजतबा को आपकी वालिदा-ए-मोहतरमा ख़ातूने जन्नत *हज़रत फ़ातिमा* रज़िअल्लाहु तआला अन्हा के पहलु में दफ्न किया गया।

 *हज़रत इमाम हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को ज़हर किस ने दिया*

 हज़रत इमाम हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को ज़हर किस ने दिया इस बात पर लोग क़यास लगाकर आपकी ही किसी ज़ौजा की तरफ इशारा करते हैं, जो कि बिलकुल गलत और बेअसल है। 

*तारीख में इस बात की कोई सनद नहीं मिलती।* और जो रिवायात मिलती है वह बग़ैर मो'तबर या मो'तमद हवाले से झूट लिख दिया गया है।  

जब हज़रत इमाम हसन इस बात पर खामोश रहे और आपने अपने भाई हज़रत इमामे हुसैन को नहीं बताया..... तो तो हम कौन होते हैं जो कियास की बुनियाद पर ज़हर खुरानी को किसी की तरफ मन्सूब करें ।

 लेकिन एक बात साफ थी कि, आप को जहर देने की साज़िश करने वाले लोग *यजीदी* और *खारजी* तबक़े से ताल्लुक रखने वाले ही थे...............

*मिन जानिब-जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा गुमला झारखंड इंडिया*

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाकी आने वाली पोस्ट में)*

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Thursday, August 10, 2023

दास्तानें करबला, क़िस्त 04*

*दास्तानें करबला, क़िस्त 04*

 *हज़रत इमामे हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की शहादत*

हज़रत अमीरे मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की बैत को कुबूल कर लेने के बाद आप ने कूफा से रुखसत फरमाई। आप मदीना-ए-तय्यबा में इक़ामत गुज़ीर हुए।

 *आप को कई बार ज़हर दे कर शहीद करने की कोशिश की गई।* कभी शहद में तो कभी खजूर में। जब भी आप पर ज़हर के असरात ज़ाहिर होते, आप *हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* के रोज़ा ए अकदस में हाज़िर होते और शिफ़ायाब हो जाते। 

 लेकिन आखिरी बार आप के पानी के मस्कीज़े में हीरे को पीस कर डाल दिया गया। आप ने पानी नोश फ़रमाया वह आपके पेट में चला गया। *इस ज़हर का असर इस क़दर लाहिक़ हुआ की रिवायतों में आता है कि आपके कलेजे के 72 टुकड़े हुए, किसी में 80 का जिक्र आया है। किसी में आया है कि आपकी आतों के टुकड़े कट कट कर बदने मुबारक से खारिज हुए। आप 40 दिन तक शदीद तकलीफ़ में रहें।*

  क़रीबे वफात हज़रते इमाम हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु हाज़िर हुए और पूछा : *आपको किसने ज़हर दिया ?*

          आपने फ़रमाया कि : मेरा गुमान जिस की तरफ़ है अगर वही दर हक़ीक़त क़ातिल है तो *अल्लाह तआला बहतर इन्तिक़ाम लेने वाला है।* और अगर वह नहीं है.... तो मैं नहीं चाहता कि मेरे सबब से कोई बेगुनाह मुसीबत में मुब्तिला हो।

  विसाल के वक़्त *आपकी उम्र 45 साल 6 माह* चंद रोज़ थी। आपकी शहादत  5 रबीउल अव्वल सि. *49 ही.* मदीना शरीफ में वाक़ेअ हुई।

विसाल के वक़्त आपने इमामे हुसैन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु से फ़रमाया था कि, मैंने उम्मुल मोअमिनीन हज़रते आयशा सिद्दीक़ा रज़िअल्लाहु तआला अन्हा से दरख़्वास्त की थी कि, मुझे हुज़ूर ﷺ के क़दमे मुबारक में दफ़न होने की जगह मिल जाए। और उन्होंने इसे क़ुबूल फरमा लिया है। 
*लेकिन मैं गुमान करता हूं कि कौम के कुछ अफ़राद इस को मना करेंगे, और अगर वह ऐसा करे तो आप उनसे तक़रार मत करना।* 

    आप ने वफ़ात के वक़्त जो गुमान किया था, वैसा ही हुआ। जब आपको दफन करने के लिए  हुज़ूर ﷺ  के रोज़ा- ए-अक़दस की जानिब ले जा रहे थे तब मरवान इब्ने हकम पलीद ने इसका पूरजोश ऐतराज किया...............

📚 सवानहे करबला सफ़ह 100)

*इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाकी आने वाली पोस्ट में*

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