Thursday, August 10, 2023

दास्तानें करबला, क़िस्त 03*

*दास्तानें करबला, क़िस्त 03*

*हज़रत इमाम हसन ए मुजतबा का कौम पर एहसान*

  *हज़रत इमाम हसन* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के तख़्ते खिलाफ़त संभालने के बाद, आपने देखा कि उम्मते मुस्लिमा *दो हुकूमतों*  में तक़सीम है।  और दोनों में जंग भी हो चुकी है. लिहाज़ा अगर ऐसा ही चलता रहा तो उम्मत हमेशा दो हिस्सों में बटी रह जाएगी ।  

  इसलिये हज़रत इमामे हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने *उम्मते मुस्लिमा को एक करने के लिए और क़ुव्वते  इस्लाम को  बढ़ाने की खातिर* हजरत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की बैत को कुबूल कर लिया और अपनी खिलाफत से दस्त बरदा हो गए । और इस तरह सय्यिदना हसन मुजतबा की कुर्बानी से *हुकूमते इस्लामीया फिर से  एक जगह पर यक़्जा (जमा) हो गई।* आलमे इस्लाम की हुकूमत का एक ही जगह मरकज़ हो गया। अब वह हुकूमत तो रही लेकिन खिलाफ़ते राशिदा ना बन सकी जिसका बयान हुज़ूर ने अपनी पेंशनगोई में किया था। 

आपकी बैत से खवारिज (सारे ख़ारजी) लोग घबरा उठे, उनके मनसूबों पर पानी फिर गया जिनका मनसूबा था कि उम्मते मुस्लिमा को आपस में लडवा कर हुकूमत को हड़पा जाए।

☘️      इस बैत से *हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक और पेशनगोई मुकम्मल हुई* जो आप ने हज़रते हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के बारे में फ़रमाई थी कि: 

 "येह मेरा फ़रज़ंद सय्यद (सरदार) है और अल्लाह त‘आला इस की बदौलत *मुसलमानों की दो जमाअतों में सुलह करेगा।"*

इस तरह हज़रत हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की बैत करने से खिलाफ़ते राशिदा का 30 साल का दौर मुकम्मल हो गया। और इस्लामी सलतनत मलूकियत (ownership) की शकल में आगे चल पड़ी।  

हज़रते हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु और हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के बिच *एक मुआहदा (contract) हुआ जिसमे ये तय हुआ :*

1️⃣     हज़रते मुआविया अपना दौरे हुकुमत ख़त्म होने के बाद अपना कोई जानशीन नामजद नहीं करेंगे और इस हुकूमत को दोबारा उम्मतें मुस्लिमा की और लौटा देंगे और उम्मत अपने ख़लीफ़ा का मुन्तख़ब वैसे ही करेगी जैसे इमाम हसन मुन्तख़ब हुवे थे यानी खुलफ़ा ए राशिदीन के तरीक़े पर।

2️⃣     अहले मदीना और अहले हिजाज़ और अहले इराक़ में किसी शख़्स से भी जमाना ए हज़रत अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के मुतल्लिक कोई मुआखज़ा और मुतालबा ना किया जाए। 

3️⃣     अमीरे मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु हज़रत इमामे हसन रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के दुयून को अदा करें। 

ये वाक़िआ रबीउल अव्वल सि. 41 हिजरी का है। 

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाकी अगली पोस्ट में)*

*मिन जानिब-जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा गुमला झारखंड*

*Next........*

*सवाब हासिल करने के लिए अपने दोस्तों को शेयर करें ताकि वह लोग भी अपने इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/Gi6tSyqbwag39Z80B5Z8Zz
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

दास्तानें करबला, क़िस्त 02*

*दास्तानें करबला, क़िस्त 02*

 हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के इजतिहादी फैसले से *आलमे इस्लाम में दो हुकमते काइम हो गई....* और उम्मत मे चार तबकात वुजूद में आ गए । 

1️⃣      *एक तबका जो खिलाफते हज़रते अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को हक़ समझता था* और आपका इतना हामी हुआ की आपकी हिमायत में हज़रत अमीरे मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्ह को बुरा कहने लगे और जंग पर उतर आये। *और सहाबी-ए-रसूल हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्ह की बेअदबी में हद से आगे बढ़ गए।*
 
          *येह तबका अपने आप को शियाने  अली कहने लगा* (इस से मुराद आज का शिया मकतबे फ़िक्र या शिया मसलक नहीं था बल्कि सियासी हिमायती होने के वजह से ये अपने आप को शियाने अली कहेलवाने लगे।)  

2️⃣      *दूसरा तबक़ा इसी तरह वुजूद में आया जिन्होंने हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की खिलाफ़त को कुबूल किया....* और मअ्ज़अल्लाह हज़रते अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को बुरा कहने लगे। ये लोग भी सहाबी-ए-रसूल की बेअदबी में हद से आगे बढ़ गए ।

    *ना कभी मौला अली शेरे खुदा रज़िअल्लाहु तआला अन्ह ने अपनी ज़ुबाने अक़दस से हज़रते मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्ह को बुरा कहा....*

           *.... और ना कभी हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने हज़रत मौला अली रज़िअल्लाहु तआला अन्ह को बुरा कहा था ।*

   जो रिवायत इससे बर-अक्स मिलती है, वह *झूटी और मनघड़त है* ताकि उम्मते मुस्लिमा में इस तफ़रक़े को और बढ़ाया जाए। *और उम्मते मुस्लिमा को आपस में लड़वाया जाए।*

3️⃣      *तीसरा तबका खवारिज का पैदा हुआ.....* जिन्होंने सहाबी ए रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम के इख़्तिलाफ़ का फ़ायदा उठाना चाहा और दोनों सहाबी-ए-रसूल की बैत करने से इनकार कर दिया और *ऐलान किया की हुकूमत का हक़ सिर्फ अल्लाह ही  को है।*

👉🏼      *सय्यिदिना मौला अली रज़िअल्लाहु तआला अन्ह* ने एक मकाम पर इनके लिये फ़रमाया की : *इनके अल्फ़ाज़ अच्छे हैं....मगर नियत बुरी है।*

👉🏼       इस ख़ारजी फ़ितने ने हज़रते मौला अली करम अल्लाहु वजहुल करीम और हज़रते मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हुमा दोनों के लिये मअ्ज़अल्लाह वाजिबुल क़त्ल और काफ़िर होने का ऐलान कर दिया।  

👉🏼      *इस फ़ितने की साजिश दोनों हुकूमत के ख़िलाफ़ शुरू हुई* और जंगे शुरू हुई जिसको हज़रत अली रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने कुचला दिया। 

👉🏼      और यही ख़ारजी फ़ितना हज़रते अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की शहादत का सबब बना ।  

👉🏼       *इन ख़वारिज का आलम यह था कि यह नमाज़, रोजा, ज़कात, नवाफिल हर चीज़ के पाबन्द थे।*  कसरत के साथ क़ुरआने करीम की तिलावत करते।  वह सारी खूबियां इनमे थी  जिस किस्म की खूबियां आज कल वहाबी देवबंदी अहले हदीस मुल्लाओ की जमाअत में पाई जाती है। 

4️⃣      *चौथा तबका:*

         चौथा तबका उम्मते मुस्लिमा की अक्सरियत का रह गया..... *जो एहले-सुन्नत-व-जमाअत कहलाया ।*

👉🏼     *इन्होने हज़रत मौला अली शेरे खुदा ही को हक़ पर माना।* उन्ही के दस्ते हक़ परस्त पर बैत की, उन्ही को  खलीफा-ए-बरहक़ और इमामे राशिद मानते और उन्ही की हुकूमत को सच्ची हुकूमत मानते। *और हज़रते मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की हुकूमत पर हया और अदब के लिहाज़ से चुप रहते थे ।*

👉🏼    चूंकि आप सहाबी ए रसूल थे, और *हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम* ने आपकी फ़ज़ीलत वाजेह कर दी थी, इसलिए किसी क़िस्म की तान दराज़ी नहीं करते थे ।

     *हज़रत अलियुल मुर्तजा करम अल्लाहु वजहुल करीम* की शहादत के बाद, जब इमाम हसन ए मुजतबा को ख़लीफ़ा चुन लिया गया, तब उन्होंने  अपने दौरे खिलाफ़त में पाया की उम्मत दो हुकूमतो में तक़सीम है। 

           हज़रत इमाम हसन  रज़िअल्लाहु तआला अन्ह ने देखा कि, खवारिज की साजिशे पूर जोश में उम्मत को तक़सीम करने में लगी हुई हैं। *लिहाजा अगर ऐसा ही चलता रहा तो उम्मत हमेशा दो हिस्सों में बटी रह जाएगी............*

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाकी आने वाली पोस्ट में)*

*मिन जानिब-जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा गुमला झारखंड*

*Next........*

*अपने दोस्तों रिश्तेदारों के इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने और सवाब हासिल करने के लिए हमारे मैसेज शेयर करें ताकि वह WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/EhTYQUxBIaW73tNwQfKDTo
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

दास्तानें करबला क़िस्त 01

*दास्तानें करबला क़िस्त 01*

*हज़रत इमाम हुसैन की विलादत*

*हज़रत इमाम हुसैन* रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की विलादते मुबारका 5 शाबान 4 हिजरी को *मदीना तैयिबा में हुई।*

सरकारे अक्दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम ने *आप के कान में अज़ान दी, मुंह में लुआबे दहन (थूक मुबारक) डाला और आप के लिये दुआ फरमाई।* फिर सात वें दिन आप का नाम हुसैन रखा और अक़ीक़ा किया। 

हज़रत इमाम हुसैन की कुन्नियत अबू अब्दुल्लाह और लकब “सिले रसूल" व "रैहानतुर रसूल" है। हदीस शरीफ में है, रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया कि हज़रत हारून अलैहिस्सलाम ने अपने बेटों का नाम शब्बर व शब्बीर रखा और *मैं ने अपने बेटों का नाम उन्हीं के नाम पर हसन और हुसैन*

*📗सवाइक़े मुहर्रिक़ा-118)*

*दास्तानें करबला का सियासी पहलू*  

*हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की पेंशनगोई (यानी ग़ैबी ख़बर)*
 
*मफ़हूम ए हदीस*

हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि: खिलाफते राशिदा मेरे बाद *तीस (30) साल तक कायम रहेगी* और 30 साल के बाद मलूक़ियत का आगाज़ हो जाएगा। तुम पर मेरी सुन्नत पर अमल करना वाजिब है और इलावा मेरे  जो खुलफ़ा ए राशिदीन है उनकी सुन्नत पर।  

(📚 मिश्कात शरीफ बाब किताबुल फ़ितन )
_____________________

*इब्तिदाए दौरे खुलफ़ा-ए-राशिदीन:*

आका ए नामदार, दो जहांन के मालिक-व-मुख्तार हुज़ूर  सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के ज़ाहिरी ज़िन्दगी से पर्दा करने के बाद.... 

1️⃣ पहले खलीफा हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़िअल्लाहु तआला अन्हु बने जिनकी  खिलाफ़त का दौर *ढाई साल* रहा....

2️⃣ फिर दूसरे ख़लीफ़ा हज़रत उमर फारूक़ रज़िअल्लाहु तआला अन्हु बने जिनका दौरे खिलाफ़त *दस साल* रहा...

3️⃣ फिर उनके बाद तीसरे ख़लीफ़ा हज़रते उसमाने गनी रज़िअल्लाहु तआला अन्हु बने जिनका दौरे खिलाफ़त *12 साल तक रहा...*

4️⃣ उनके बाद चौथे ख़लीफ़ा हज़रते अली-युल-मुर्तज़ा रज़िअल्लाहु तआला अन्हु का दौरे खिलाफ़त *5 साल रहा...*

इस तरह पहले चार ख़लीफ़ा का दौरे खिलाफ़त *साढ़े उनत्तीस बरस* तक रहा।  

इसके बाद, पहले चार ख़ुलफ़ा ए राशिदीन ही की तरह उसी सुन्नत और उसी तरीक़ा ए हाल के मुआफ़िक *हज़रते सय्यिदना इमाम हसन* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु को खलीफ़ा-ए-राशिद मुकर्रर किया गया.... तो गोया वोह पांचवे खलीफा ए राशिद थे।  

👉🏼    हज़रत सय्यिदना हसन ए मुजतबा 6 माह तक खिलाफते राशिदा के मनसब पर फ़ाइज़ रहे।  इस तरह *हुज़ूर की पेंशनगोई के हिसाब से दौरे खिलाफ़ते राशिदा की 30 साल की मुद्दत मुकम्मल हुई।*

 *खिलाफत के मसअले पर उम्मत में तफ़रीक की इब्तिदा*

जब *हज़रते उस्माने गनी* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु की शहादत हुई *तब से खिलाफते इस्लामिया को तक़सीम करने का अमल शुरू हो गया था ।*
 
जब *हज़रत सय्यिदुना अली* शेरे खुदा तख़्त-ए-खिलाफ़त पर बैठे तो उस ज़माने में *हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु मुल्के शाम (यानी दमिश्क़) के हाकिम (गवर्नर) हुआ करते थे।*  

*हज़रते अली* रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने तख़्ते खिलाफ़त संभाला तब *हज़रते मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने आपकी खिलाफ़त पर बैत करने से इन्कार कर दिया* और मुल्के शाम में अपनी गवर्नरी को *आज़ाद हुकूमत* में बदल दिया।  

*उलमा ए अहले सुन्नत के नज़दीक ये है कि खिलाफ़ते हज़रत अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ही हक़ पर कायम थी।* और चुंकि हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु हुज़ूर के सहाबी थे इसलिये आपके के इस क़दम को खता-ए-इज्तिहादि क़रार देते हैं (और खता-ए-इज्तिहादि में ये है की अगर गलती भी हुई हो तो अल्लाह तआला उसे माफ़ फरमा देता हैं ) 

हज़रत मुआविया रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के आज़ाद हुकूमत कायम करने से आलमे इस्लाम में दो हुकूमतें क़ाइम हो गईं और उम्मत मे चार तबक़ात वुजूद में आ गए............

*(इन्शा अल्लाहुर्रहमान बाकी अगली पोस्ट में)*

*मिन जानिब- जमाअत रज़ा ए मुस्तफ़ा, गुमला झारखंड*

*Next........*

*अपने इल्मे दीन में इज़ाफ़ा करने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें👇🏿*

https://chat.whatsapp.com/EhTYQUxBIaW73tNwQfKDTo
*__________________________*

*🌹 तालिबे दुआ 🤲👇*

*ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत*

  🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
*🌹-मसलके आलाहज़रत-🌹*
        *🌹ज़िन्दाबाद 🌹*
  🌷🌺🌸🌻🌸🌺🌷

Saturday, August 5, 2023

USEFUL INFORMATION ABOUT LEMON

USEFUL INFORMATION ABOUT LEMON.

લીંબુમાં વિટામિન સી હોય છે. લીંબુને આયુર્વેદમાં એક મહત્વપૂર્ણ ફળ માનવામાં આવે છે, જેને નિષ્ણાતો દ્વારા શ્રેષ્ઠ રોગ નાશક અને રોગપ્રતિકારક શક્તિ વધારતા ફળ તરીકે ઓળખવામાં આવે છે. લીંબુનો ઉપયોગ ઘરગથ્થુ ઉપચાર અને દવા તરીકે થાય છે. પોષક તત્વોથી ભરપૂર લીંબુના ઘણા ફાયદા છે. ચાલો જાણીએ લીંબુના નિયમિત સેવનથી થતા સ્વાસ્થ્ય લાભો અને ફાયદાઓ વિશે.

પેટની સમસ્યામાં લીંબુ ફાયદાકારક છે

કબજિયાત

આ સિવાય જો તમને ઉલ્ટી થતી હોય તો અડધો કપ પાણીમાં લીંબુનો રસ, જીરું અને એક એલચીના દાણાને મિક્સ કરી લો. તેને બે કલાકના અંતરાલમાં પીવાથી ઉલ્ટી બંધ થાય છે.

ઉલ્ટી

જો તમને પાચન અથવા પેટ સંબંધિત સમસ્યાઓ હોય તો તમે લીંબુના રસનું સેવન કરી શકો છો. સવારે ઉઠ્યા પછી ખાલી પેટે બે ગ્લાસ પાણીમાં એક લીંબુ અને થોડું મીઠું નાખીને પીવો. સાંજે પણ લીંબુમાં મીઠું ઉમેરીની તેનું પાણી પીવો. આમ કરવાથી તમને કબજિયાતથી રાહત મળશે.

ખાટી ઓડકાર

ખાવાની યોગ્ય ટેવ ન હોવાને કારણે ખોરાક પચતો નથી, જેના કારણે શરીરમાં એસિડિટી વધી જાય છે અને ખાટા ઓડકાર આવવા લાગે છે. તેનાથી છુટકારો મેળવવા માટે પીણામાં લીંબુનો રસ, ખાંડ અને થોડું મીઠું નાખીને પીવાથી આરામ મળે છે.

વજનમાં ઘટાડો

લીંબુનો રસ વજન ઘટાડવા અથવા સ્થૂળતા ઘટાડવા માટે ફાયદાકારક છે. રોજ સવારે એક ગ્લાસ પાણીમાં એક લીંબુનો રસ અને બે ચમચી મધ ભેળવીને પીવાથી વજન ઓછું થાય છે.

વાળ ખરવા

જો ટાલ પડવાની ફરિયાદ હોય તો લીંબુ ખૂબ જ ફાયદાકારક સાબિત થાય છે. તેનાથી વાળ ખરતા અટકે છે. પાકેલા કેળામાં લીંબુનો રસ ભેળવીને પેસ્ટ બનાવો અને તેને નિયમિત રીતે માથાના મૂળમાં લગાવો. ટાલ દૂર થાય છે. આમળાના પાઉડરમાં લીંબુનો રસ મિક્સ કરીને પણ વાળમાં લગાવી શકાય છે, તેનાથી ખોળો દૂર થાય છે અને વાળ કાળા અને લાંબા થાય છે.

Friday, August 4, 2023

नमाज़ का तर्जुमा (अर्थ) हिन्दी में🌴*

नमाज़ का तर्जुमा (अर्थ) हिन्दी में
🌴*

आप जब नमाज़ पढ़ते हैं तो वही आयतें और सूरतें दोहराते रहते हैं और नमाज़ मुकम्मल हो जाती है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि नियत करने से लेकर सलाम फेरने तक आप ने अल्लाह से क्या कहा, जो भी पढ़ा इसका क्या मतलब था ,अगर आप जानते हैं तो माशा अल्लाह ❗

अल्लाह आपके इल्म में बरकत दे

लेकिन अगर आप नहीं जानते हैं तो आपको जानना चाहिए, क्यूंकि *नमाज़ में अल्लाह बन्दे से बात करता है, लेकिन अगर आपको यही नहीं मालूम कि मैं अल्लाह से क्या कह रहा हूँ ❓तो आप सिर्फ़ अपनी ड्यूटी पूरी करके मस्जिद से निकल आयेंगे,* लेकिन नमाज़ से जो फ़ायदे मिलने वाले थे और आपके जिस्म और रूह में जो असर पड़ने वाला था वो नहीं हो पायेगा

 इसलिए आप जब नमाज़ पढ़ें तो ध्यान आपका अल्लाह ही की तरफ़ हो, न कि दुनियावी चीज़ों में उलझा हुआ हो, और ये तब हो सकता है जब हमें नमाज़ में पढ़ी जाने वाली चीज़ का मतलब मालूम होगा, और हम नमाज़ में क्या कह रहे हैं ये पता होगा, इसीलिए इस पोस्ट में हम ने नमाज़ में पढ़ी जाने वाली हर तस्बीह का मतलब बताया है

*🌴मुकम्मल नमाज़ का तरजुमा हिन्दी में*

*अल्लाहु अकबर 🌴*
*तर्जुमा :- अल्लाह सब से बड़ा है* 

💐सना💐

सुबहानक अल्ला हुम्मा व बिहम्मदिका व तबारकस्मुका व तआला जददुका वला इलाहा गैरुक
*तर्जुमा* :- ए अल्लाह ! तेरी ज़ात पाक है औए खूबियों वाली है, तेरा नाम मुबारक है, और तेरी शान ऊंची है और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं

 *अऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम* 
*तर्जुमा* :-  मैं अल्लाह की पनाह में आता हूँ, शैतान मरदूद से

*बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम* 
*तर्जुमा* :- अल्लाह के नाम से शुरू जो बड़ा महरबान निहायत रहम करने वाला है

सूरह फ़ातिहा

1. अल्हम्दु लिल्लाही रब्बिल आलमीन
*तर्जुमा*:- तमाम तारीफें उस अल्लाह ही के लिये है जो तमाम क़ायनात का मालिक है

2.अर रहमा निर रहीम
 *तर्जुमा* :- जो रहमान और रहीम है।

3.मालिकी यौमिद्दीन
*तर्जुमा* :- जो रोजे जजा(कयामत के दिन) का मालिक है।

4.इय्याका नअ’बुदु व इय्याका नस्तईन
*तर्जुमा* :- हम तेरी ही इबादत करते हैं, और तुझ ही से मदद चाहते हैं

5.इहदिनस् सिरातल मुस्तक़ीम
*तर्जुमा*:-  हमें सीधा रास्ता दिखा।

6.सिरातल लज़ीना अन अमता अलय हिम
*तर्जुमा*:-  उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम फ़रमाया,

7.गैरिल मग़दूबि अलैहिम् वलद्वाल्लीन
*तर्जुमा*:- उन लोगों का रास्ता नहीं जिन पर तेरा गजब नाजिल हुआ और ना उन लोगो का जो राहे हक़ से भटके हुए है

आमीन...
 *तर्जुमा*:-  ऐसा ही हो❗

 🌹*सूरह इखलास* 🌹

1.कुल हु अल्लाहु अहद
*तर्जुमा* :- आप कह दीजिये कि अल्लाह एक है

2. अल्लाहुस समद
*तर्जुमा* :- अल्लाह बेनियाज़ है

3. लम यलिद वलम यूलद
*तर्जुमा* :- वो न किसी का बाप है और न ही किसी का बेटा है

4. वलम यकुल लहू कुफ़ुवन अहद
*तर्जुमा*:- और न कोई उस के बराबर है

🌹*अल्लाहु अकबर*🌹
*तरजुमा* :  अल्लाह सब से बड़ा है

( रुकू में )सुब हान रब्बियल अज़ीम
*तर्जुमा* : - पाक है मेरा रब और अज़मत वाला है

( रुकू से उठने के बाद ) समिअल्लाहु लिमन हमिदह
*तर्जुमा* : - अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी तारीफ़ की

रब्बना लकल हम्द
*तर्जुमा* : - ऐ हमारे रब तेरे ही लिए तमाम तारीफ़ें हैं

अल्लाहु अकबर
*तर्जुमा* : - अल्लाह सब से बड़ा है

 
( सज्दे में ) सुबहान रब्बियल आला
*तर्जुमा*:-  पाक है मेरा रब बड़ी शान वाला है

(दूसरे सज्दे से उठने के बाद )

🌹अत तहिय्यात 🌹

अत तहिय्यातु लिल्लाही वस्सलवातु वत्तय्यीबातु
अस्सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व रहमतुल्लाही व बरकातुहू
अस्सलामु अलैना व अला इबदिल्लाहीस सालिहीन
अश हदु अल ला इलाहा इल्लल्लाहू व अश हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू
*तर्जुमा*:- तमाम इबादतें सिर्फ़ अल्लाह के लिए हैं, और तमाम नमाज़ें और अच्छी बातें (भी अल्लाह के लिए हैं)

सलाम हो आप पर ए नबी ( सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम ) और अल्लाह की रहमतें और उसकी बरकतें हों

हम पर भी सलाम हो और अल्लाह के नेक बन्दों पर भी

मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और गवाही देता हूँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं

🌹दुरूद शरीफ़ 🌹

अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मद
कमा सल्लैता अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम इन्नका हमीदुम मजीद

अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मद
कमा बारकता अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम इन्नका हमीदुम मजीद

 *तर्जुमा*:-  ए अल्लाह ! हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहू अलैही व सल्लम) पर, और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जिस तरह हज़रत इब्राहीम (अलैहिस सलाम) पर रहमत नाज़िल फ़रमाई, यक़ीनन आप तारीफ़ के लाइक और बड़ी बुज़ुर्गी और अजमत वाले हैं

ए अल्लाह ! हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) पर और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा जिस तरह हज़रत इब्राहीम (अलैहिस सलाम) पर बरकत नाज़िल फ़रमाई यकीनन आप तारीफ़ के लाइक और बड़ी बुज़ुर्गी और अजमत वाले हैं

🌹दुआए मासूरा 🌹

अल्लाहूम्मा इन्नी ज़लम्तु नफ्सी ज़ुलमन कसीरा
वला यग फिरूज़ ज़ुनूबा इल्ला अन्ता फग फिरली
मग फिरातम मिन इन्दिका
वर हम्नी इन्नका अंतल गफूरुर रहीम

*तर्जुमा*:-  ए अल्लाह ! बेशक हम ने अपनी जान पर बहुत ज़ुल्म किया और तेरे सिवा कोई भी गुनाहों को माफ़ नहीं कर सकता, बस अपनी ख़ास इनायत से हम को बख्श दे और मुझ पर रहम फ़रमा, बेशक तू ही बख्शने वाला और बेहद रहम वाला है

रब्बना आतिना फिद दुनिया हसनतव वाफिल आखिरति हसनतव व किना अज़ाबन नार
*तर्जुमा*:-  ए हमारे रब ! हमें दुनिया में भी भलाई अता फरमा और आखिरत में भी भलाई अता फरमा और हमें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा ले

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह 
*तर्जुमा*:-  सलामती हो तुम पर, और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों

*नमाज़ मुकम्मल हुई*🧎‍♂️

 *जितना आपके दिल में इस्लाम को फैलाने की तडप हो उतना इस कमेंट को फैलाए ❗
*दुआओ में याद रखना*

786/92 Duaa

ASSALAMUALAIKUM WA RAHMATULLAHI WA BARKATAHU 

JUMMA MUBBARAK 

*🤲या अल्लाहﷻ हमारे सगीरा व कबीरा गुनाहौं को माफ फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमारी खताओं को दरगुज़र फार्मा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमें कामिल ईमान नसीब फरमा और पूरी हिदायत फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमारी ज़बान पर कलमा ए तय्यबा हमेशा जारी रख.*
*🤲 या अल्लाहﷻ हमें अपनी ख़ास  रहमतें, बरकतें और अनवारात से मालामाल फ़र्मा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमारे दिलों को इख़लास के साथ दीन की तरफ़ फेर दे*
*🤲याअल्लाहﷻ अपनी खास रहमत नाज़ील फरमा और अपने कहेर व अज़ाब से बचा*
*🤲या अल्लाहﷻ झूठ, गीबत, कीना, बुग़ज़ , तकब्बुर बुराई और झगडे से हमारी हिफाज़त फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ एक लम्हे के लिए भी हमें दुनीया के हवाले ना फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ तंगदस्ती, खौफ़, घबराहट और क़र्ज़ के बोझ को दूर फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ हश्र की रुसवाई से हम और  हमारे  वालिदैन और पूरी उम्मत-ए-मोहम्मदिया की हिफ़ाज़त फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ पुल सिरात से बिजली की तराह गुज़ार दे*
*🤲या अल्लाहﷻ बीना हिसाब व किताब जन्नतुल फिरदौस में हमें जगह अता फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ नाम-ए-आमाल हमारे दाहिने हाथ में अता फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ अपने अर्श के साये में हमें जगह नसीब फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ हज्ज-ए-बैतुल्लाह मक़बूल व मबरूर नसीब फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ  मुंकिर नकिर के सवालात हम पर आसान फरमा*
🤲 *या अल्लाहﷻ  हलाल रोज़ी  अता फरमा*

*🤲या अल्लाहﷻ  इस दुनीया से कोरोना वायरस की वबा का खातमा करदे*

*🤲या अल्लाहﷻ क़यामत के रोज़ अपना दीदार अता फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमें तेरे बंदो का मोहताज ना बना*
🤲 *या अल्लाहﷻ छोटी बड़ी बीमारी से हमारी और कुल* *उम्मत-ए-मोहम्मदिया की हिफ़ाज़त फ़रमा*
*🤲या अल्लाहﷻ  तक्वा और परहेज़गारी नसीब फ़र्मा*
*🤲या अल्लाहﷻ आपﷺ के प्यारे तरीके हमें सीखा दे ,और आप ﷺ की सून्नत पर अमल करने की तौफीक दे*
*🤲या अल्लाहﷻ क़यामत के दिन हुज़ूर ﷺ की शिफ़ाअत नसीब फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ क़यामत के दिन हुज़ूर ﷺ के मुबारक हाथों से जाम-ए-कौसर पीना नसीब फ़र्मा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमारे दिलों में अपनी और हुज़ूर ﷺ की  मोहब्बत नसीब फरमा*
*🤲या अल्लाह हमें सच्ची और पक्की तौबा करने की तौफ़ीक अता फ़र्मा*

*🤲 या-रहमान, या-रहीम, या-मलिक, या-कुदूस, या-सलाम, या-ग़फ़्फ़ार, या-ग़फ़ूर, या-करीम हमारे तमाम गुनाहों का माफ़ फ़र्मा*
*🤲या अल्लाह हमें गुनाहों  से नफ़रत दे दे, * या अल्लाहﷻ जाने अंजाने में हमसे जो गलतियां हुई है उन्हें माफ़ फ़र्मा, या-अल्लाह हम जो गलियतों की तौबा करना भूल गए उन गलतियों को भी माफ फरमा*
*🤲या अल्लाह तमाम मरहुमीन को जन्नत उल फिरदौस में जगह अता फरमा, दोज़ख़ के अज़ाब से कब्र के अज़ाब से और जहन्नुम के आग से बचा*
*🤲या अल्लाह हमें नेक बाना (अमीन)*
*🤲या अल्लाह हमारे बच्चों को नेक तौफीक और नेक हिदायत अता फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमारे बच्चों की ज़िन्दगी आसान कर दे*
*🤲या अल्लाहﷻ हमारे बच्चों  को इम्तेहान में  काम्याबी अता फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ हमें अपने  माँ बाप की तरफ़ प्यार और सब्र से पेश आने की तौफीक अता फरमा*
*🤲या अल्लाहﷻ तमाम उम्मते मुस्लिमा की जाइज़ दुआएं क़ुबूल फ़र्मा*
*🤲ऐ अल्लाह ﷻ* *हमारी दुआओं को अपने फ़ज़ल ओ करम से अपने रहम ओ करम से क़बूल फ़र्मा*

*रब्बना आतीना फिद दुनिया हसनतव् व फिल आखिरती हसनतव् व कीना अज़ाबन नार*
*व कीना अजाबुल क़ब्र* 
*व कीना अजाबुल हश्र*
*व कीना अज़ाबुल फक्र*
*व कीना अजाबुल मीज़ान*
*व कीना अजाबुल कर्ज़*
*व कीना अजाबुल मर्ज़*
*व कीना आज़ाबुल आफात*
*व कीना अज़ाबुल सकरात*
*व कीना अज़बुल मौत*
*व किना अज़ाबुल फ़ितनतुल*  *मसिहिद दज्जाल*
*व किना अज़ाबन्नार...* *(आमीन)*

*🤲 ऐ अल्लाहﷻ इस दुनीया से कोरोना की वबा का खातमा करदे*
(आमीन)

 *इस दुआ को इतना फैलाए के सारी  उम्मत की  मगफिरत हो जाए*

*ये बोहोत कीमती दुआ है सब को भेजो ..*   🤲

Tuesday, July 18, 2023

मुह़र्रमुल ह़राम

मुह़र्रमुल ह़राम

*▶️हिस्सा-01*

✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨

*▶️इस्लाम में पहला महीना मुहर्रमुल ह़राम है*
 
*▶️और मुह़र्रम को मुह़र्रमुल ह़राम क्यूँ कहा जाता है आइए थोड़ा रोशनी डालते चलें⤵️*

*▶️मुह़र्रम के महीने को मुह़र्रमुल ह़राम उसकी ताज़ीम की वजह से कहते हैं,लफ्ज़े ह़राम ये ह़ुरमत से है, इसके माने हैं*

*▶️क़ाबिल अह़तराम,अज़मत वाला,तो मुह़र्रमुल ह़राम का माना हुआ, मुह़र्रम का महीना जो क़ाबिल अह़तराम है अज़मत वाला है*

*▶️ जैसा कि मस्जिदे ह़राम के माना हैं वह मस्जिद जो क़ाबिले अह़तराम और अज़मत वाली है-*

*▶️मुह़र्रमुल ह़राम उन चार महीनों में से है जिन्हें अल्लाह तबारक व तआला ने ह़ुरमत वाले महीने क़रार दिया है*
*▶️वो चार महीने ये हैं⤵️*

*▪️ज़िल क़ाईदा* 
*▪️जिल हिज्ज* 
*▪️मुह़र्रम* 
*▪️रज्जब*

*📚तफ़्सीरे सीरातुल जिनान पारा 10 आयत सूरह तौबा आयत 36*

*▶️ज़मानये जाहिलियत में भी इन चार महीनों का अह़तराम किया जाता था*

*▶️और ज़मानये जाहिलियत में भी इस महीने में जंग व क़िताल ह़राम था*

*📚 खाज़िन सूरह तौबा तहत आयत 36*

*▶️यौमे आशूरा यानि मुहर्रम की दसवीं तारीख़ बड़ी अज़मत व बुज़ुर्गी और फ़ज़लो शर्फ़ वाली है इस तारीख़ में बहुत सारे काम हुए हैं उन में यहाँ चंद ज़िक्र करना चाहता हूँ⤵️*

*▶️अब आईये आपको बताते हैं कि इस महीने में शहादते इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के अलावा भी और बहुत सारे काम हुए हैं,इस महीने की 10 तारीख को क्या क्या काम हुये फेहरिस्त मुलाहजा करें⤵️*

*01:--फिरऔन और उसका लश्कर गर्क हुआ*

*02:--  हज़रत सय्यदना आदम अलैहिस्सलाम की तौबा क़ुबूल हुई*

*03:--हज़रत सय्यदना यूनुस अलैहिस्सलाम की क़ौम की तौबा क़ुबूल हुई*

*04:--  हज़रत सय्यदना नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती जूदी पहाड़ पर ठहरी,उस दिन शुकराने पर रोज़ा रखा और तमाम को रोज़ा रखवाया*

*05:---हज़रत सय्यदना इब्राहीम अलैहिस्सलाम पैदा हुए*

*06:---  हज़रत सय्यदना ईसा अलैहिस्सलाम पैदा हुए*

*📚फैज़ुल क़दीर शरह जामेय सगीर जिल्द 3 सफह 34*
*📚बारह माह के फज़ाइल सफह 246*

*07:--  हज़रत सय्यदना यूसुफ अलैहिस्सलाम क़ैद से बाहर आये*

*08:--- सय्यदना यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से बाहर आये*

*📚फैज़ुल क़दीर शरह जामेय सगीर जिल्द 5 सफह 226*

*09:--  हज़रत सय्यदना मूसा अलैहिस्सलाम पैदा हुए*

*10:--  हज़रत सय्यदना इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर आग गुलज़ार हुई* 

*11:---  हज़रत सय्यदना अय्यूब अलैहिस्सलाम ने मर्ज़ से शिफा पाई*

*12:--- हज़रत सय्यदना याक़ूब अलैहिस्सलाम की आंख की रौशनी वापस आई*

*13:--- हज़रत सय्यदना यूसुफ अलैहिस्सलाम कुंए से बाहर निकले*

*14:--- हज़रत सय्यदना सुलेमान अलैहिस्सलाम को बादशाहत मिली* 

*15:--- हज़रत सय्यदना मूसा अलैहिस्सलाम जादुगरों पर ग़ालिब आये*

*📚अजाइबुल मख़्लूक़ात सफह 44*

*16:--- सय्यदना इमामे हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने मरतब ए शहादत हासिल किया*

*17:---क़यामत इसी दिन आयेगी*

*18:--- पहली बार बारिश हुई*

*📚गुनियतुत तालेबीन जिल्द 2 सफह 53*

*19:--- आसमान,*

 *20:-- कुर्सी,*

 *21:--- कलम,*

*22:--- पहाड़,*

*23:--- समन्दर, पैदा हुए*

*24:--- हज़रत सय्यदना इदरीस अलैहिस्सलाम जन्नत में पहुंचे*

*25:--- इसी दिन असहाबे कहफ करवटें बदलते हैं*

*26:--- ह़ज़रते ईसा अलैहिस्सलाम आसमान पर उठाए गए*

*27:--- हमारे नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का निकाह हज़रते खदीजा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा से हुआ*

*📚 जामेय सगीर,जिल्द 5,सफह 34/226*
*📚 अजायबुल मखलूक़ात,सफह 44*
*📚 गुनियतुत तालेबीन,जिल्द 2,सफह 53* 
*📚 नुज़हतुल मजालिस,जिल्द 1,सफह 145*
*📚खुतबाते मुहर्रम सफह 460*

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Tuesday, July 4, 2023

जमाही

शैतानी थूक से अपने मुँह को बचाइये:-  

सय्यदे आलम सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने फरमाया कि जमाही शैतान की तरफ से है जब तुममें किसी को जमाही आए जहा तक मुमकिन हो रोके बाज़ रिवायतों में है कि शैतान मुंह में घुस जाता है और बाज़ में है कि शैतान देखकर हंसता है उलमा फरमाते हैं कि जो जमाही में मुंह खोल देता है शैतान उसके मुंह में थूक देता है और वह जो काह काह की आवाज़ आती है वह शैतान का कहकहा है कि उसका मुंह बिगड़ा देखकर ठट्ठा लगाता है और वह जो रुतूबत निकलती है वह शैतान का थूक है इसके रोकने की बेहतर तर्कीब यह है कि जब आती मालूम हो तो दिल में ख्याल करे कि अम्बिया अलैहिस्सलातु वस्सलाम इससे महफूज हैं फौरन रुक जाएगी जैसे कि पेशतर बयान किया जा चुका है उलमाए किराम ने इसको मुजर्रब बताया है और फ़कीर कातेबुल हुरूफ ने बारहा इसका तजर्बा किया तो सही पाया।..
 🌸 निज़ामे  शरीअत  सफ़ाह  125
┈┈┈••┈┈••✦✿✦••┈┈••┈┈┈•

Sunday, June 11, 2023

મધ

જો તમને પણ શરદી,ખાસી રહે છે તો મધમાં આ કેટલીક વસ્તુઓને ભેળવીને પીવાથી આ સમસ્યાઓ થશે દૂર 

મધ અને એલચીનો પાવડર શરદી મટાડે છે
મધ અને હરદળ કફને છૂટો પાડે છે

મધ ઔષધી ગુણોથી ભરપુર છે ,મઘનો ઉપયોગ મોટા ભાગના લોકો દવા તરીકે કરતા આવ્યા છે, મધ જૂદી જૂદી રીતે લેવાથી ઘણી બઘી બીમારીઓ મટે છે,જો ક ેઘણા લોકો સવારે હુફાળા પાણીમાં મધનાખીને પીતા હોય છે તેનાથી વેઈટ લોસ થાય છે ચરબી ઓગળે છે ,જો કે આપણે આજે મધને કઈ કઈ વસ્તુઓ સાથે ખાવાથી શું ફાયદાઓ થાય છે તે જાણીશું
મધ અને પાણી

દરરોજ સવારે ખાલી પેટ હુફાળા ગરમ પાણીમાં મધ મેળવીને પીવાથી રોગપ્રતિકારક શક્તિ વધે છે. આ સાથે જ પેટની ચરબી ઓગળવાથી લઈને વેઈટ લોક કરવામાં મોટી મદદ મળે છે.આ સાથે જ પેટમાં હાજર ખરાબ બેક્ટેરિયાનો ખાતમો થાય છે.

મધ અને એલચી

1 ચમચી મધમાં 2 એલચીને વાટીને પાવડર બનાવી તેની સાથે મિક્થેસ કરીને ખાવાથી શરદી, ખાસી મટે છે,સાથે જ જો કફ થયો હોય તો તે છૂટો પડીને ગળા વાટે નીકળે છે. જો અવાજ બેસી ગયો હોય તો પણ મધ એલચીનું સેવન ખૂબ ફાયદો કરાવે છે
મધ અને હરદળ 

ગળાના ઇન્ફેક્શનથી આ મિશ્પરણ તમને રાહત આપવાનું કામ કરે છે. આ સાથે જ જે લોકોને સુકી ખાસી હોય તેમના માટે પણ આ રામબાણ ઈલાજ છે. સાથે જ ગળાની અંદર કાકરા થયા હોય અથવા તો સોજો આવ્યો હોય ત્યારે મધ હરદળ દવાનું કામ કરે છે.

મધ અને લવિંગનો પાવડ

મધ અને લવિંગના પાવડરનું મિશ્રણ લિવરને ડિટોક્સિફાઇ કરવામાં પણ મદદ કરે છે. સાથે જ બ્લડ શુગર લેવલને પણ કન્ટ્રોલમાં રાખશે. તે માટે ત્રણ લવિંગ પીસીને તેમાં એક ચમચી મધ મિક્સ કરીને ખાવું જોઈએ.
મધ અને લીબું

ગરમ પાણી સાથે મધ અને લીબું મિક્સ કરીને પીવાથી વજન ઝડપથી ઘટે છે. સાથે જ પાચનની ક્રિયા મજબૂત બને છે અને પાચન શક્તિમાં સુધારો થાય છે,જે લોકોને એસિડીટીની સમસ્યા હોય તેમણે સવારે ખાલી પેટે મધ લીબું વાળું ગરમ પાણી પીવું જોઈએ

મધ અને આદુનો રસ

1 ચમચી મધમાં અડધી ચમચી આદુનો રસ મિક્સ કરીને પીવાથી ખાસી ,શરદી મટે છે,ગળામાં પણ રાહત થાય છે.આ સાથે જ બેસી ગયેલો આવાજ ખુલે છે. જે લોકોને સતત ગળું સુકાતું હોય તેમણે આ મિશ્રણનું સેવન કરવું જોઈએ.
મધ અને સૂંઠ

મધની તાસિર ઠંડી છે તો સૂઠ ગરમ છે એટલે જ્યારે ખૂબ ખાસી હોય ત્યારે આ બન્નેનું સેવન કરવું જોઈએ આ સાથે જ ઠંડા પાણીથી ન્હાયા હોય અથવા સ્વિમિંગ પુલમાંથી બહાર આવ્યા હોય ત્યારે એક ચમચી મધ અને અડધી ચમચી સૂંઠ ચાટી જવું જેથી શરદી થશે નહી કાન અને ગળાનો દુખાવો પણ મટશે.

Wednesday, May 31, 2023

गीबत की तबाह कारियां

' *गीबत की तबाह कारियां एक नज़र में :* 
 बहुत सारे परहेज़ गार नज़र आने वाले लोग भी बिला तकल्लुफ़ गीबत सुनते, सुनाते, मुस्कुराते और ताईद में सर हिलाते नज़र आते हैं, चूंकि गीबत बहुत ज़ियादा आम है इस लिये उमूमन किसी की इस तरफ़ तवज्जोह ही नहीं होती कि गीबत करने वाला नेक परहेज़ गार नहीं बल्कि फासिक व गुनहगार और अज़ाबे नार का हक़दार होता है।

 कुरआनो हदीस और अक्वाले बुजुर्गाने दीन से मुन्तख़ब कर्दा गीबत की 120 तबाह कारियों पर एक सर-सरी नज़र डालिये, शायद खाइफ़ीन के बदन में झुरझुरी की लहर, | दौड़ जाए ! 

जिगर थाम कर मुला-हज़ा फ़रमाइये : गीबत ईमान को काट कर रख देती है
 गीबत बुरे खातिमे का सबब है 
ब कसरत गीबत करने वाले की दुआ कबूल नहीं होती
 गीबत से नमाज़ रोज़े की नूरानिय्यत चली जाती है 
गीबत से नेकियां बरबाद होती हैं 
गीबत नेकियां जला देती है
 गीबत करने वाला तौबा कर भी ले तब भी सब से आखिर में ।
 जन्नत में दाखिल होगा,
 अल ग़ज़ गीबत गुनाहे कबीरा, क़तई हराम और जहन्नम में ले जाने वाला काम है
गीबत जिना से सख्त तर है
 मुसल्मान की गीबत करने वाला सूद से भी बड़े गुनाह में गिरिफ्तार है 
गीबत को अगर समुन्दर में डाल दिया जाए तो सारा समुन्दर बदबूदार हो जाए
गीबत करने वाले को जहन्नम में मुर्दार खाना पड़ेगा 
गीबत मुर्दा भाई का गोश्त खाने के मु-तरादिफ़ है 
गीबत करने वाला अजाबे कब्र में गिरिफ्तार होगा !
 गीबत करने वाला तांबे के नाखुनों से अपने चेहरे और सीने को बार बार छील रहा था 
गीबत करने वाले को उस के पहलूओं से गोश्त काट काट कर खिलाया जा रहा था 
गीबत करने वाला। क़ियामत में कुत्ते की शक्ल में उठेगा
 गीबत करने वाला जहन्नम का बन्दर होगा 
गीबत करने वाले को दोज़ख़ में खुद अपना ही गोश्त खाना पड़ेगा
 गीबत करने वाला जहन्नम के खौलते हुए पानी और आग के दरमियान मौत मांगता दौड़ रहा होगा और उस से जहन्नमी भी बेज़ार होंगे 
गीबत करने वाला सब से पहले जहन्नम में जाएगा।
تُوبُوا إِلَى الله ! اسْتَغْفِرُ الله